MEA reply to China Pakistan: चीन और पाकिस्तान ने अपनी दोस्ती के 75वीं सालगिरह के मौके पर संयुक्त बयान जारी करके दोनों देशों के बीच की साझेदारी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने का भरोसा जताया है. इस बयान में कहा गया कि दोनों देश चीन-पाक आर्थिक गलियारे (CPEC) के एडवांस वर्जन (CPEC 2.0) पर भी साथ काम करने जा रहे हैं. यह गलियारा भारत के भूभाग से गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का कुछ कब्जा है. ऐसे में भारत ने हमेशा की तरह एक बार फिर सीपैक पर चीन और पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए उनके अनुचित उल्लेखों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है.

पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा
चीन और पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘भारत चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के अनुचित उल्लेखों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है. भारत का स्पष्ट रुख संबंधित पक्षों को अच्छी तरह पता है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और हमेशा रहेंगे. किसी भी देश को इस पर टिप्पणी या बयान देने का हक नहीं है. तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) परियोजनाओं के संबंध में, जिनमें से कुछ भारत की संप्रभुता में हैं, हम अन्य देशों द्वारा इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे को मजबूत करने या वैध ठहराने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध और खंडन करते हैं, जो भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करता हो. यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है
चीन-पाकिस्तान के बीच कोई बॉर्डर नहीं
रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमने चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा-पार जल संसाधन सहयोग के जिक्र को भी देखा है. इन दोनों देशों के बीच कोई सीमा साझा नहीं होती, इसलिए सीमा-पार जल संसाधन सहयोग का सवाल ही नहीं उठता है. भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 के सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है.’
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पाकिस्तान की नासमझी की टाइम लाइन
हाल ही की कुछ मिसाल देकर समझाएं तो 2022 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए समझाया था कि ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा था और रहेगा’. तब यूपीआर के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे तुषार मेहता ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद के लगातार खतरे के बावजूद अगस्त 2019 से जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है.
साल 2023 में विदेश मंत्रालय ने यही बात कही थी कि – ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और रहेगा’.
साल 2025 में भी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को अच्छे से समझा दिया गया था कि कश्मीर में आतंकवाद फैलाओगे तो बचोगे नहीं.
पांच अगस्त 2019 को जब भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष दर्जा खत्म करके उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटा था, भारत तब भी अपने स्टैंड पर मजबूती से डटा था. पाकिस्तान तब भी नादान बनकर सच्चाई से दूर भागा था. बीते 79 सालों से भारत ये बात पाकिस्तान को सैकड़ों बार समझा चुका है, लेकिन अक्ल से पैदल पाकिस्तानियों को ये बात समझ ही नहीं आ रही है.





