मंगलवार के दिन शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली. बैंक, तेल और गैस, और फार्मा शेयरों में गिरावट के कारण ये सेंसेक्स और निफ्टी दोनों इंडेक्स नीचे गिरे. सोमवार के मुकाबले निवेशकों का मूड बदल गया. उसके तीन कारण देखने को मिले. पहला सबसे बड़ा कारण अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में हमले किए, जिससे मध्य-पूर्व में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की चिंताएं फिर से बढ़ गईं. दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतें रहीं. जो एक बार फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब दिखाई दी. तीसरा सबसे बड़ा कारण डॉलर के सामने में रुपए में गिरावट आई.
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बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 76,010 पर बंद हुआ, जिसमें लगभग 479 अंकों या 0.63 फीसदी की गिरावट आई. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 23,933 पर बंद हुआ, जो 98 अंक या 0.41 फीसदी नीचे था. सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, टीसीएस, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक और टाइटन रहे. वहीं, टेक महिंद्रा, इटरनल, मारुति सुजुकी और एचयूएल के शेयरों में तेजी देखने को मिली. फ्रंटलाइन इंडेक्स के मुकाबले ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा. निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में क्रमशः 0.5 फीसदी और 0.35 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
टेंशन और क्रूड क्रूड ऑयल
जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर जो थोड़ी-बहुत उम्मीदें थीं, वे दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सेना के ऑपरेशन के बाद तेज़ी से खत्म हो गईं. उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम के चलते कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आया और रुपये में जो थोड़ी-बहुत मज़बूती आई थी, वह भी खत्म हो गई. उन्होंने बताया कि महीने के F&O एक्सपायरी के कारण पहले से ही जोखिम भरे माहौल में तकनीकी बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिसके चलते घरेलू शेयर बाज़ार गिरावट के साथ बंद हुए. नायर ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी साप्ताहिक आधार पर कम बनी हुई हैं, जिससे बाजार अभी भी इस बात की काफी संभावना मानकर चल रहे हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है.
अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी
मंगलवार को अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए. वास्तव में निवेशक हाल के सैन्य हमलों के बावजूद मध्य पूर्व में चल रही शांति वार्ताओं को लेकर आशावादी बने रहे. वहीं, चिप स्टॉक्स में AI-बेस्ड तेजी ने भी बाजार के माहौल को और मजबूती दी. डॉव जोन्स से जुड़े फ्यूचर्स में 0.48 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स में क्रमशः 0.52 फीसदी और 0.77 फीसदी की तेजी आई.
यूरोप में मिलाजुला असर
यूरोपीय बाजारों में मंगलवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला. हाल की तेजी के बाद बाजार में थोड़ी नरमी आई. तेल की बढ़ती कीमतों और दक्षिणी ईरान में अमेरिका द्वारा फिर से किए गए हमलों ने अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही शांति समझौता होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. स्टॉक्स यूरोप 600 इंडेक्स में 0.2% की गिरावट आई, हालाँकि यह संघर्ष की शुरुआत के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब ही बना रहा. ब्रिटेन के एफटीएसई 100 इंडेक्स में 0.7% की बढ़त दर्ज की गई, जबकि जर्मनी के डैक्स इंडेक्स में 0.7% की गिरावट आई. एमएससीआई वर्ल्ड इक्विटी इंडेक्स दिन भर लगभग स्थिर रहा, लेकिन इस महीने अब तक इसमें कुल 3.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की जा चुकी है.
एशियाई बाजारों में उछाल
एशियाई बाजारों की बात करें तो, जापान का नेक्कई 225 इंडेक्स 0.25% की गिरावट के साथ 64,996.09 के स्तर पर बंद हुआ. इससे पहले, सोमवार को एआई से जुड़े स्टॉक्स को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीदों के चलते इस इंडेक्स में 2.87 फीसदी की जबरदस्त तेजी आई थी और यह पहली बार 65,000 के आंकड़े को पार कर बंद हुआ था. पिछले तीन कारोबारी सत्रों में इस इंडेक्स में कुल 8.95 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, जो छह साल से भी ज्यादा समय में इसकी सबसे बड़ी तीन-दिवसीय तेजी है. जापान का व्यापक टोपिक्स इंडेक्स भी 0.1% की मामूली गिरावट के साथ 3,938.46 के स्तर पर बंद हुआ. इस बीच, दक्षिण कोरिया के कॉस्पी इंडेक्स को भी टेक्नोलॉजी सेक्टर में आई जबरदस्त तेज़ी का लगातार फायदा मिला. इसमें 2.6% की बढ़त दर्ज की गई और यह एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.
कच्चे तेल का असर और डॉलर सामने रुपया
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर के करीब पहुंच गईं. सुबह के सत्र में दर्ज की गई बढ़त को आगे बढ़ाते हुए, कीमतों में लगभग 4% का उछाल आया. यह तेजी तब आई जब US सेना ने दक्षिणी ईरान में हमले किए, और इस कार्रवाई को रक्षात्मक बताया. इन घटनाओं से बाजार में तनाव बना रहा. US सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने दक्षिणी ईरान में कुछ ठिकानों पर हमले किए हैं, जिनमें वे नावें भी शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की जा रही थी, और मिसाइल लॉन्च करने वाली जगहें भी. सेना के अनुसार, इन हमलों का मकसद ईरानी सेना से होने वाले खतरों से US सैनिकों की रक्षा करना था. मंगलवार को 3:30 p.m. IST तक, भारतीय रुपया 0.47 फीसदी कमजोर होकर U.S. डॉलर के मुकाबले 95.68 पर बंद हुआ; इससे पहले यह 95.23 पर बंद हुआ था.





