World’s Largest High-Speed Railway Station : चीन ने महज 38 महीनों में दुनिया के सबसे बड़े हाई-स्पीड रेलवे स्टेशन के निर्माण का काम पूरा कर लिया है. ये स्टेशन पहाड़ की चोटी पर बनाया गया है और इसके निर्माण में रोबोट आर्मी तथा एडवांस AI तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया. इस मेगा प्रोजेक्ट को क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेलवे स्टेशन बताया जा रहा है. दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग में स्थित ये विशाल स्टेशन करीब 12 से 12.2 लाख वर्गमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे एक बड़े हाई-स्पीड रेल हब के रूप में विकसित किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 7.8 अरब डॉलर रही है.
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पहाड़ काटकर बनाया गया स्टेशन
इस परियोजना की सबसे खास बात इसकी लोकेशन है. स्टेशन का निर्माण समतल जमीन पर नहीं बल्कि पहाड़ी इलाके में किया गया. इसके लिए इंजीनियरों को पहले पूरे पहाड़ को काटकर, समतल बनाकर और दोबारा आकार देकर निर्माण योग्य बनाना पड़ा. रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर साझा विजुअल्स के अनुसार, खुदाई शुरू करने से पहले पूरे इलाके की 3D मैपिंग की गई. चट्टानों को हटाने के लिए नियंत्रित विस्फोट तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जबकि बड़े स्तर पर ग्राउंडवर्क कर साइट को निर्माण के लिए तैयार किया गया.
क्षमता और आकार दोनों में विशाल
इस स्टेशन में 29 प्लेटफॉर्म और 15 रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं. इसे पीक समय में हर घंटे करीब 16,000 यात्रियों को संभालने के हिसाब से डिजाइन किया गया है. समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, स्टेशन की मल्टी-लेवल संरचना में आठ मंजिल शामिल हैं. प्लेटफॉर्म की लंबाई 400 मीटर से ज्यादा रखी गई है ताकि बेहद लंबी हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन किया जा सके. यह चीन के तेजी से विस्तार कर रहे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
निर्माण में AI और रोबोट्स का इस्तेमाल
इस प्रोजेक्ट में AI सिस्टम, 5G नेटवर्क और कई तरह के कंस्ट्रक्शन रोबोट्स का इस्तेमाल किया गया. लेजर-गाइडेड स्क्रीड रोबोट्स की मदद से कंक्रीट सतहों को बेहद सटीक तरीके से समतल किया गया. वहीं, ग्लास इंस्टॉलेशन रोबोट्स ने 800 किलोग्राम तक वजनी ग्लास पैनलों को उठाकर फिट किया, जिससे काम की रफ्तार बढ़ी और हादसों का खतरा कम हुआ. इसके अलावा वेल्डिंग रोबोट्स और 24 घंटे निगरानी करने वाले रोबोट्स भी साइट पर तैनात रहे. AI आधारित सिस्टम ने काम की दक्षता बढ़ाने, श्रम लागत घटाने और निर्माण को तेज करने में अहम भूमिका निभाई.
इंजीनियरिंग का बड़ा कारनामा
निर्माण कार्य में करीब 20 लाख घनमीटर कंक्रीट और लगभग 3.66 लाख टन स्टील का इस्तेमाल किया गया. पीक निर्माण अवधि के दौरान लगभग 40,000 मजदूर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. सबसे जटिल इंजीनियरिंग चरणों में स्टेशन की छत का निर्माण शामिल था. 16,500 टन वजनी स्टील रूफ स्ट्रक्चर को पहले जमीन पर तैयार किया गया और फिर हाइड्रोलिक तकनीक से 57 मीटर ऊपर उठाकर अपनी जगह पर स्थापित किया गया. यह छत 41 मीटर ऊंचे पेड़ के आकार वाले स्टील कॉलम्स पर टिकी है, जिन्हें ‘हुआंगजुए’ कॉलम कहा जाता है. इन्हें भूकंप प्रतिरोध और बेहतर संरचनात्मक मजबूती के लिए डिजाइन किया गया है. पहाड़ी ढलान पर करीब 57 मीटर ऊंचाई तक स्टेनलेस स्टील क्लैडिंग भी लगाई गई.
चीन के रेल नेटवर्क का अहम केंद्र
चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन चीन के तेजी से बढ़ते हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा है. यह स्टेशन दक्षिण-पश्चिम चीन को चेंगदू, वुहान, शियान, कुनमिंग, बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझोउ, चांग्शा और झांगजियाजी समेत 14 बड़े शहरों से जोड़ेगा. पूरी तरह संचालन शुरू होने के बाद यह स्टेशन चीन की हाई-स्पीड रेल प्रणाली के सबसे महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट हब्स में से एक माना जाएगा और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग का प्रतीक बनेगा.





