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बिजली की कमी या डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर, यूपी में किल्लत की असली वजह क्या है?

उत्तर प्रदेश के हर शहर में इस वक्त भीषण गर्मी पड़ रही है. इस बीच बढ़ता तापमान और उस पर हो रही बिजली कटौती ने लोगों में गुस्सा भर दिया. बिजली कटौती के खिलाफ लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदेश में बड़े स्तर पर हो रही बिजली कटौती को लेकर लोगों में आक्रोश है. बताया जा रहा है कि यूपी के कई शहरों में 8 से 10 घंटों की बिजली कटौती हो रही है. ग्रामीण इलाकों में तो हाल और ज्यादा खराब हैं. जहां बिजली संकट है. उसमें यूपी की राजधानी लखनऊ के साथ कई बड़े शहर शामिल हैं. आइए जानते हैं कि प्रदेश में बिजली की कमी है या फिर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर है.

Khabar Monkey

बिजली की कमी या डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर, यूपी में किल्लत की असली वजह क्या है?
बिजली की कमी या डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर, यूपी में किल्लत की असली वजह क्या है?

उत्तर प्रदेश के सीतापुर, गोंडा और रायबरेली बिजली कटौती की जा रही है. भीषण गर्मी में बिजली कटौती ने लोगों का बुरा हाल किया हुआ है. अब लोग इसके खिलाफ सड़कों पर आ गए हैं. हाल ये है कि शासन ने लखनऊ के 31 सब स्टेशनों को संवेदनशील इलाका मानते हुए वहां PAC की तैनाती करने का फैसला किया है. और बड़ी खबर ये आई है कि बिजली कटौती को लेकर रविवार सुबह 10.30 बजे सीएम योगी एक समीक्षा बैठक करने वाले हैं. जिसमें बिजली आपूर्ति के साथ साथ फॉल्ट, ट्रिपिंग और अफसरों की जवाबदेही पर चर्चा होगी.

गर्मी ने बढ़ाया पारा, बिजली कटौती ने किया परेशान

इससे पहले शुक्रवार को ही ये रिपोर्ट आई थी कि दुनिया के 22 सबसे गर्म शहरों में पारा 47 डिग्री से ज्यादा है और इनमें 13 शहर यूपी के हैं. सोचिए इस गर्मी में अगर लाइट भी ना हो तो लोगों का क्या होगा. प्रयागराज में तापमान 44 डिग्री के करीब बना हुआ है लेकिन लोगों का कहना है कि 5 से 6 घंटे की बिजली कटौती हो रही है. वाराणसी में भी तापमान 43 से 44 डिग्री का कांटा छू रहा है लेकिन लोग बता रहे हैं कि 4 से 6 घंटे के बिजली संकट से हालत खराब है.

प्रदेश की राजधानी का भी बुरा हाल

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पारा 43 डिग्री के पास है लेकिन यहां लोगों का दावा है कि इस गर्मी में 4 से 6 घंटे की कटौती असहनीय हो रही है. कानपुर का हाल भी बिल्कुल ऐसा ही है. जहां गर्मी के बीच लोगों को 5-7 घंटे की बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है जबकि ग्रामीण इलाकों में हालत और खराब है. कुछ ऐसी ही स्थिति आगरा से बहराइच तक और गोंडा से रायबरेली तक बनी हुई है.

बढ़ती बिजली की मांग की वजह से चरमराई व्यवस्था

बिजली की डिमांड पर एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी में 17 मई को बिजली की मांग 28 हजार 904 मेगावाट थी. जो 18 मई को बढ़कर 29 हजार 330 मेगावाट पर पहुंच गई थी. इसी तरह 19 मई को बिजली की ये मांग बढ़कर 30 हजार मेगावाट के भी पार निकल गई थी. जबकि 20 मई को प्रदेश में 30 हजार 458 मेगावाट की डिमांड दर्ज की गई. इसके अलावा 21 मई को रात के समय में ये आंकड़ा 33 हजार मेगावाट तक जा पहुंचा. यानी सिर्फ 5 दिन में मांग यूपी में 4000 मेगावाट तक बिजली की मांग बढ़ गई है. जबकि आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष मई में अधिकतम मांग 28 हजार 858 मेगावाट थी.

डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम कमजोर, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिका विभाग

लेकिन सवाल ये है क्या यूपी में बिजली का जो संकट आया है क्या वो सिर्फ बढ़ती डिमांड की वजह से है. या वजह वो मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर भी है, जो इस वजन को उठा रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार आशंका है यूपी के ये हालत बिजली की कमी से ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर के फेल होने से भी है. उनका मानना है यूपी में प्रचंड गर्मी के बीच अचानक बढ़ी बिजली की मांग को मौजूदा और पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर संभाल नहीं पा रहा है.

क्षमता से अधिक लोड उठाने की वजह से पुराने ट्रांसफार्मर भी बार बार खराब हो रहे हैं. जबकि कमजोर और पुराने तार वोल्टेज की समस्या झेल नहीं पा रहे हैं. और जब बड़ी संख्या में तकनीकी खराबी आ रही है तो ठीक करने में भी देरी हो रही है. क्योंकि संविदा कर्मियों की संख्या में कमी तो की गई लेकिन नए कर्मचारी और मजदूरों की भर्ती नहीं की गई.

बीजेपी विधायक ने उर्जा मंत्री को लिखा पत्र

तो समस्या बिजली डिमांड की है. या उसे थर्मल पावर प्लांट या नेशनल ग्रिड से निकालकर लोगों के घर के पंखे या एसी तक पहुंचाने वाला तारों और ट्रांसफार्मरों का सिस्टम कमजोर है. ऐसा दावा है साल दर साल बिजली लोड तो बढ़ता रहा, लेकिन उस हिसाब से ट्रांसफॉर्मर्स, केबल जैसी जरूरी चीजो को अपग्रेड नहीं किया गया.

एक और BJP के विधायक ने ऊर्जा मंत्री को बिजली संकट पर लेटर लिखा है और दावा किया है कि यूपी के चंदौली में अभी सिर्फ 12-13 घंटे तक ही बिजली मिल रही है. जिससे लोग परेशान है. ये शिकायत चंदौली के सैयदराजा विधानसभा से विधायक सुशील सिंह ने की है. यानी यूपी में बिजली संकट लगातार बड़ा होता जा रहा है. अब सरकार इससे कैसे निपटेगी ये देखना है.

(टीवी9 ब्यूरो रिपोर्ट)

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