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अब भारत से हथियार खरीदेगा फ्रांस? DRDO मुख्यालय में हुई बड़ी बैठक

भारत की रक्षा ताकत अब सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं है बल्कि दुनिया के बड़े-बड़े देश भी भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी और रिसर्च क्षमता को गंभीरता से ले रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी मिसाल हाल ही में देखने को मिली जब फ्रांस का एक हाई लेवल डेलीगेशन डीआरडीओ मुख्यालय पहुंचा और भारत के साथ एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी पर चर्चा की। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी बल्कि आने वाले समय में भारत और फ्रांस की रक्षा साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला एक बड़ा संकेत है। दरअसल फ्रांस की रक्षा खरीद और टेक्नोलॉजी एजेंसी डीजीए यानी कि डायरेट जनरल ऑफ आर्मामेंट्स के डेलीगेट जनरल पैट्रिक पैक्स के नेतृत्व में एक डेलीगेशन 20 मई को डीआरडीओ मुख्यालय के दौरे पर पहुंचा। यहां पर उनकी मुलाकात डीआरडीओ चेयरमैन डॉ. समीर कामत के साथ हुई। इस मुलाकात की जानकारी खुद डीआरडीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए दी है। 

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डीआरडीओ के मुताबिक दोनों देशों के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी में सहयोग को और मजबूत बनाने पर गंभीर चर्चा हुई। यानी अब भारत और फ्रांस सिर्फ हथियार खरीद बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहते हैं। बल्कि नई पीढ़ी के रक्षा तकनीकों को साथ मिलकर विकसित करना चाहते हैं। एक समय था जब भारत रक्षा उपकरणों के लिए बाकी देशों पर निर्भर रहता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती जा रही है। डीआरडीओ लगातार ऐसी हाईटेक तकनीक विकसित कर रहा है जिसने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। और अब यहां समझने वाली बात यह है कि फ्रांस जैसा देश जिसके पास दुनिया की बेहतरीन मिलिट्री टेक्नोलॉजी है वो भी बार-बार डीआरडीओ के पास क्यों आ रहा है। 

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इसका जवाब है डीआरडीओ की बढ़ती हुई क्षमता। आज डीआरडीओ सिर्फ मिसाइल नहीं बना रहा बल्कि वो क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंडर वाटर रोबोटिक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में लीड कर रहा है। दुनिया को समझ आ गया है कि भारत के पास ना सिर्फ टैलेंट है बल्कि रिसर्च के लिए जबरदस्त इकोसिस्टम भी है।  यही वजह है कि अब फ्रांस जैसे बड़े रक्षा साझेदार भी भारत के साथ मिलकर रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयरिंग को बढ़ाना चाहते हैं। पिछले साल डीआरडीओ और फ्रांस के डीजीए के बीच एक बड़ा टेक्निकल एग्रीमेंट भी साइन हुआ था। इस समझौते का मकसद भविष्य की रक्षा चुनौतियों के लिए मिलकर नई तकनीक विकसित करना था। इस समझौते के तहत दोनों देश एयरनॉटिकल प्लेटफॉर्म्स, अनमैन व्हीकल्स, एडवांस मटेरियल, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, नेविगेशन सिस्टम, एडवांस सेंसर क्वांटम टेक्नोलॉजीस और अंडर वाटर वेफेयर जैसी कई अहम टेक्नोलॉजीस पर एक साथ काम कर रहे हैं।

Khabar Monkey

khabarmonkey@gmail.com

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