Is Climate Emergency Going to Happen in India? उत्तर भारत में पिछले 10 दिनों से गर्मी ने कहर मचा रखा है. यूपी का बांदा जिला तो इस मामले में रिकॉर्ड ही तोड़ रहा है. वहां पर पिछले कई दिनों से तापमान 48 डिग्री के आसपास बना हुआ है. तमाम अन्य शहरों का भी लगभग ऐसा ही हाल है. यहां तक हिमाचल के ऊना जैसे ठंडे स्थान माने जाने वाले जिले भी 44 डिग्री का तापमान झेल रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत अब जलवायु आपातकाल (Climate Emergency) की तरफ बढ़ रहा है? क्या अब भारत के लिए भी ब्रिटेन जैसा कदम उठाने का वक्त आ गया है. आइए, आपके इन सारे सवालों का बारी-बारी से जवाब देते हैं. उससे पहले जान लेते हैं कि बीते 10 सालों में आपके शहर का तापमान कितना बढ़ गया है?

विभिन्न शहरों में कितना बढ़ा तापमान?
दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां की गर्मी अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गई है. पिछले 10 सालों में गर्म दिनों और गर्म रातों की संख्या बढ़ी है. 2024 में कुछ इलाकों में 52°C तक तापमान पहुंच गया. हीट आइलैंड इफेक्ट की वजह से आसपास के गांवों की तुलना में शहरी क्षेत्र 4-8% ज्यादा गर्म हो रहे हैं. लोग रात को भी राहत नहीं पा रहे हैं.
मुंबई
मुंबई की जलवायु को पहले सुहावना माना जाता था, लेकिन समुद्री शहर होने के बावजूद अब वहां गर्मी और नमी दोनों बढ़ गए हैं. पिछले दशक में शहर का औसत तापमान 0.5-0.6°C ऊपर चला गया है. आर्द्रता 7% ज्यादा बढ़ चुकी है, जिसकीी वजह से लोग पसीने में तर-बतर रहते हैं. बाढ़ की समस्या तो पुरानी है, लेकिन अब छोटी-छोटी बारिश भी शहर को जलमग्न कर देती है.
बेंगलुरु
दक्षिण भारत में सबसे बढ़िया जलवायु वाला शहर बेंगलुरु को माना जाता था. इसे ठंडा और सुहावना शहर मानकर हर कोई वहां आशियाना बनाने की कोशिश करता था. लेकिन अब यहां भी गर्म दिन बढ़ गए. पिछले 10 सालों में तापमान में 0.5°C से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. 2019 में 86 दिन औसत से ज्यादा गर्म रहे. पेड़ कटने और कंक्रीट बढ़ने से रातें भी गर्म हो गई हैं.
चेन्नई
चेन्नई में तापमान और नमी का खतरनाक कॉम्बिनेशन लोगों पर कहर ढहा रहा है. गर्मी के साथ अब वहां भारी बारिश भी मात्रा भी बढ़ी है. पिछले दशक में हीट स्ट्रेस बहुत बढ़ा है, जिससे लोगों के बीमार होने और मौत की तादाद भी बढ़ गई है. बाढ़ की घटनाएं अब पहले से ज्यादा देखने को मिल रही हैं, जिससे शहर की जिंदगी ठप हो जाती है.
कोलकाता
पूर्वी भारत का यह महानगर मधुर मौसम के लिए जाना जाता था. लेकिन अब उसकी पहचान गर्मी और भारी आर्द्रता वाले शहर के रूप में बन गई है. वहां पर दिन के साथ ही रात में भी ज्यादा तापमान रहता है. जिसकी वजह से लोगों को रात में नींद नहीं आती है. अब वहां पर बाढ़ और चक्रवात भी ज्यादा आने लगे हैं.
Khabar Monkey
हैदराबाद
हैदराबाद का तापमान अभी अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है. वहां पर गर्मी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. लेकिन नमी 10% बढ़ गई. इससे गर्मी का असर ज्यादा लगता है. शहर के आसपास के ग्रामीण इलाके अब कंक्रीट के जंगल के रूप में बदलते जा रहे हैं. जिससे वहां की स्थिति भी खराब होती जा रही है.
अहमदाबाद और जयपुर
गुजरात के अहमदाबाद और राजस्थान के जयपुर में भी पिछले कई सालों से गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही है. इन दोनों राज्यों के कई स्थानों पर गर्मियों में तापमान 50°C के पार चले जाना अब आम हो गया है. दोनों राज्यों में हीटवेव के दिन बढ़े हैं.
अब पूरे देश की बात करें तो पिछले 10 सालों में पूरे भारत में हीटवेव की संख्या और तीव्रता, दोनों बढ़ी हैं. वर्ष 2024 में हीटवेव के 536 दिन रिकॉर्ड हुए.बाढ़ और भारी बारिश भी अब पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ गई हैं. इसकी वजह से देश में काफी लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है.
जलवायु में आ रहे इस बदलाव की वजह से ग्राउंड वाटर लेवल में कमी आ रही है और किसानों को फसलों की बर्बादी झेलनी पड़ रही है. इसके चलते लोग मजबूर होकर शहर छोड़ रहे हैं. हालात कंट्रोल करने के लिए सरकार कदम भी उठा रही है. लेकिन जितना काम होना चाहिए था, उतना अब तक नहीं हो पाया है. जिसके चलते हालात दिनोंदिन खराब होते जा रहे हैं.
क्या देश में लगने जा रही क्लाइमेट इमरजेंसी?
भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश लगभग इसी तरह की परिस्थिति का सामना कर रहे हैं. इसके लिए वहां कई आपात उपाय किए जा रहे हैं. ब्रिटेन ने 1 मई 2019 को दुनिया का पहला देश बनकर क्लाइमेट इमरजेंसी का ऐलान किया था. भारत ने अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए लगता है कि हम भी तेजी से उसी राह पर चल रहेहैं. पिछले 10 सालों में देश का औसत तापमान करीब 0.3-0.4°C बढ़ा है. गर्मी लगातार बढ़ रही है, हीटवेव आ रही हैं, बाढ़ का प्रकोप बढ़ गया है और बारिश का पैटर्न बिगड़ रहा है. अगर हालात ऐसे ही रहे तो सरकार को क्लाइमेट इमरजेंसी का एलान करना ही होगा.





