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इस्लाम में खड़े होकर पेशाब करना कैसा है, नौजवान मुस्लिम जान लें!

इस्लाम में खड़े होकर पेशाब करना कैसा है, नौजवान मुस्लिम जान लें!

इस्लाम में बैठकर पेशाब करने का हुक्म है। जो बंदा खड़े होकर पेशाब करता है तो उस पर खुदा की लानत है। मौत के बाद उसके साथ कब्र में सख्ती की जाती है। कई युवा मुस्लिम खड़े होकर पेशाब करते हैं। ऐसा करने से कपड़ों पर मूत्र के छींटे तो पड़ते ही हैं और वे नापाक भी हो जाते हैं। तो चलिए हम यहां पर आपको बताएंगे कि इस्लाम में खड़े होकर पेशाब करना (Islam me Khade Hokar Peshab Karna) कैसा है। युवा मुस्लिम इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कोई एक बंदा भी अगर बैठकर इस्तिंजा (istinja) करने लग गया तो आपकी आखिरत संवर जाएगी।

इस्लाम में बैठकर पेशाब (istinja) करने का हुक्म है। खड़ो होकर पेशाब करने की सख्त मनाही है। अल्लाह के रसूल फरमाते हैं कि जिसने खड़े होकर पेशाब (Islam me Khade Hokar Peshab Karna) किया तो मानो उसने खुद पर कब्र के अजाब को वाजिब कर लिया।

हदीस में क्या लिखा है ?

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि

“पेशाब के छींटों से बचो जो कि आम तौर पर क़ब्र के अज़ाब की वजह बनता है”

संदर्भ – सहीह बुखारी, जिल्द 1, सफह 34

क्यों मना है मुसलमानों का खड़े होकर पेशाब करना ?

खड़े होकर पेशाब (istinja) करने से जो मूत्र के छींटे मोमिन के कपड़े और बदन पर लगते हैं तो उससे वह उस वक्त तो नापाक होता ही है, लेकिन मरने के बाद उसे कब्र में भी शदीद अजाब से सामना करना पड़ता है। अल्लाह हमें बैठकर पेशाब (istinja) करने की तौफीक अता फरमाएँ। खासकर युवा मुस्लिमों के बीच में ये पोस्ट जमकर शेयर करें।

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