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कैसे काम करते हैं सेलिब्रिटी PR, कैसे कंट्रोल होता है पब्लिक का ओपिनियन। सिनेमा का सिस्टम

फिल्म रिलीज हो, अफेयर की खबर हो, किसी स्टार का विवाद हो या फिर अचानक किसी अभिनेता की “नेशनल क्रश” वाली इमेज बन जाए, इन सबके पीछे अक्सर एक मजबूत पीआर काम कर रही होती है।

कैसे काम करते हैं सेलिब्रिटी PR, कैसे कंट्रोल होता है पब्लिक का ओपिनियन। सिनेमा का सिस्टम
कैसे काम करते हैं सेलिब्रिटी PR, कैसे कंट्रोल होता है पब्लिक का ओपिनियन। सिनेमा का सिस्टम

आज के दौर में सेलिब्रिटी सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि एक ब्रांड बन चुके हैं। और इस ब्रांड को बनाने, बचाने और बेचने का काम पब्लिक रिलेशन टीम यानी पीआर करती है।

क्या होता है सेलेब्स का पीआर?

सेलेब्रिचटा पीआर का मतलब है किसी अभिनेता, अभिनेत्री, सिंगर या इंफ्लुएंसर की सार्वजनिक छवि को इस तरह मैनेज करना कि लोगों के बीच उसकी लोकप्रियता बनी रहे या और बढ़े।

PR टीम यह तय करती है कि मीडिया में कौन-सी खबर जाएगी। किस इंटरव्यू में क्या बोला जाएगा। सोशल मीडिया पर किस तरह की पोस्ट डाली जाएगी। विवाद होने पर क्या सफाई दी जाएगी और कब किसी स्टार को विक्टिम औप नेशनल आइकन की तरह पेश करना है

कैसे बनाया जाता है पब्लिक ओपिनियन?

  1. खबरों की टाइमिंग

कई बार देखा गया है कि जैसे ही किसी फिल्म का ट्रेलर आने वाला होता है, स्टार से जुड़ी कोई पर्सनल खबर वायरल होने लगती है। जैसे- किसी का रिलेशनशिप, शादी की अफवाह, एयरपोर्ट लुक, जिम वीडियो या फिर किसी विवाद पर बयान।

इन खबरों का मकसद अक्सर चर्चा बनाए रखना होता है ताकि स्टार लगातार ट्रेंड में रहे।

  1. इमेज बिल्डिंग का गेम

हर स्टार की एक तय इमेज बनाई जाती है। जैसे कोई कोई नेक्स्ट डोर बॉय बनता है। कोई संस्कारी बहू, कोई बेबाक फेमिनिस्ट तो कोई एंग्री यंग मैन। PR टीम इस इमेज के हिसाब से इंटरव्यू, सोशल मीडिया पोस्ट और पब्लिक अपीयरेंस डिजाइन करती है।

  1. सोशल मीडिया ट्रेंड्स और फैन क्लब
  2. आज PR सिर्फ मीडिया तक सीमित नहीं है। एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड बनवाना भी इसका हिस्सा है

जैसे-
हैशटैग ट्रेंड कराना
फैन पेज चलवाना
मीम्स वायरल कराना
पॉजिटिव ट्वीट्स बढ़ाना
निगेटिव खबरों को दबाना

Khabar Monkey

ये सब डिजिटल PR का हिस्सा बन चुका है।

  1. विवाद होने पर डैमेज कंट्रोल

जब कोई सेलिब्रिटी विवाद में फंसता है, तब PR की असली परीक्षा शुरू होती है। ऐसे समय में अक्सर, भावुक पोस्ट शेयर की जाती है, मेंटल हेल्थ या प्राइवेसी की बात उठती है।

कई बार स्टार सीधे जवाब नहीं देते, बल्कि सूत्रों के हवाले से खबरें चलती हैं ताकि प्रतिक्रिया को टेस्ट किया जा सके।

क्या PR सच में लोगों की सोच बदल देता है?

पूरी तरह नहीं, लेकिन काफी हद तक हां। बार-बार एक ही नैरेटिव दिखाने से लोगों की धारणा प्रभावित होती है। इसे परसेप्शन मैनेजमेंट कहा जाता है। अगर किसी स्टार को लगातार डाउन टू अर्थ बताया जाए, तो लोग उसे वैसा मानने लगते हैं।

अगर किसी अभिनेता को आउटसाइडर की तरह पेश किया जाए, तो उसके लिए सहानुभूति बढ़ती है। लेकिन अब दर्शक पहले जैसे नहीं रहे। सोशल मीडिया के दौर में PR का खेल आसान भी और मुश्किल हुआ है। अब लोग पुरानी क्लिप्स निकाल लेते हैं, इंटरव्यू कंपेयर करते हैं और फेक नैरेटिव जल्दी पकड़ लेते हैं।

इसी वजह से कई बार PR उल्टा भी पड़ जाता है। जब लोगों को लगता है कि कोई स्टार जरूरत से ज्यादा परफेक्ट दिखने की कोशिश कर रहा है, तो ट्रोलिंग शुरू हो जाती है।

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