Effect of Screen Time: कहते हैं उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होने लगती है, लेकिन अब कम उम्र में ही हम चीजें भूलने लगे हैं। मोबाइल स्क्रीन के दौर में युवा से लेकर बुजुर्ग सभी को मेमोरी की प्रॉब्लम हो रही है। मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर हमारी निर्भरता बढ़ती जा रही है।

घर की ग्रॉसरी लिस्ट से लेकर स्कूल के होम वर्क तक के लिए फोन का इस्तेमाल बढ़ गया है। पुराने जमाने में 20-25 तक के पहाड़े यूं ही याद हो जाते थे। 10 सेकेंड के इस रील काल में हमने अपनी मेमोरी को स्वाहा कर दिया है।
फोन का असर सीधे मस्तिष्क पर
गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता से हमारे ब्रेन की स्वाभाविक क्षमता खत्म हो रही है। फोन हमारी जीवनशैली को आसान बनाने के लिए है, लेकिन अब यह जीवन का अंग बन गया है। छोटे-बड़े सभी कामों के लिए इस पर निर्भर होने का प्रभाव यह है कि मस्तिष्क को अब पर्याप्त काम नहीं मिल रहा। इससे मस्तिष्क की सेहत खराब हो रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हमारे ब्रेन को नई जानकारी को इकट्ठा करके उसे याद रखने में कठिनाई होती है।
मल्टी टास्किंग कर रहा नुकसान
भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें लगता है कि हम एक साथ कई काम को निपटा सकते हैं। कई काम एक साथ पूरे तो हो रहे हैं, लेकिन इससे हमें संतुष्टि नहीं मिल रही है। थकान हमेशा हावी रहती है। दरअसल, लंबा दिमाग पर भारी दबाव पैदा करता है। इससे लोगों की सोचने-समझने, तर्क करने व निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। यही इन दिनों भूलने की आदत का एक बड़ा कारण बन रहा है।
क्या है भूलने के लक्षण?
- फोन, लैपटॉप, आईपैड या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब पास न हो, तो घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है।
- आसान से काम को भी पूरा करने में कठिनाई का महसूस होना।
- समस्याओं को सामने देखकर हताश हो जाना या उससे निपटने में असमर्थता जताना।
- डिसीजन मेकिंग कैपेसिटी का कम होना।
- याददाश्त कमजोर होने की वजह से परिवार व दोस्तों से अलग-थलग रहना।
- किसी बात, डायलॉग या कम्युनिकेशन में समस्या।
- ब्रेन फॉगिंग।
- फोटो को समझने में परेशानी।
कैसे पाएं इन समस्याओं से निजात?
दिमाग को कुछ वक्त के लिए से विराम दें और अपना दिमाग ब्रेन इंगेजिंग एक्टिविटी में लगाएं। इससे दिमाग एक्टिव रहेगा। डिजिटल जीवन को मैनेज करें। इसके लिए अपने फोन से यूजलेस ऐप्स को हटाएं, अनावश्यक मैसेज को इग्नोर करें, नोटिफिकेशन बंद करना आदि। स्क्रॉल से बचने के लिए किताबों में अपना ध्यान लगाएं।
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इसके अलावा
- म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना।
- मीनिंगफुल पॉडकास्ट सुनने की आदत डालना।
- नक्शा पढ़ने और समझने का प्रयास करें।
- दिशा का पता लगाने की कोशिश करें।
- पहेली, शतरंज, क्रॉसवर्ड, ब्रेन टीजर का अभ्यास करें।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
- एकाग्रता में परेशानी हो।
- इच्छा शक्ति का कमजोर होना।
- सामान्य जिंदगी व कामकाज अस्त-व्यस्त हो जाए।
- तनाव व चिंताएं बढ़ने लगे।
- बिना फोन हाथ में लिए कोई काम करना कठिन लगे।
- हर वक्त फोन खोने या खराब होने का भय।




