उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में बड़ा पेंशन घोटाला सामने आया है. फर्जी पीपीओ (पेंशन भुगतान आदेश) सर्टिफिकेट लगाकर 2 सालों तक एक दो नहीं, बल्कि 8 एडहॉक टीचर्स विभाग का चूना लगाते रहे. मामले में सभी टीचर्स के दोषी पाए जाने के बाद उपनिदेशक वाराणसी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं. इसी फर्जीवाड़े से सरकार को लाखों का नुकसान हुआ है.
Khabar Monkey

जिला विद्यालय निरीक्षक गाजीपुर प्रकाश सिंह ने बताया कि मामला साल 2013-14 का है, जब गाजीपुर के करीब पांच एडहॉक टीचर्स अपने वेतन को लेकर कोर्ट चले गए थे. कोर्ट ने सभी को वेतन देने के निर्देश दिए थे और फिर उन्हीं आदेशों का आधार बनाकर बाद में तीन शिक्षक और कोर्ट चले गए और इनको भी कोर्ट ने वेतन देने का आदेश दे दिया. टीचर्स की एलिजिबिलिटी 20 साल की सेवा देने के बाद पेंशन पाने को होती है, उसे यह पूरा नहीं कर रहे थे.
फर्जी पीपीओ सर्टिफिकेट
उनकी सेवा पुस्तिका के अनुसार 2027 में रिटायर होना था, लेकिन इन लोगों ने साल 2024 में ही रिटायरमेंट ले ली. इसके बाद पेंशन के लिए पीपीओ का फर्जी सर्टिफिकेट गाजीपुर कोषागार में जमा किया था. इस मामले की परत उस समय खुली जब स्वर्गीय एडहाॅक टीचर हरिद्वार राम गंगा प्रसाद की पत्नी प्रमिला देवी ने साल 2018 पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी पेंशन को स्वीकृत नहीं मिली.
दो साल से विभाग को लगा रहे थे चूना
इसके बाद उन्होंने शिकायत उनके पति के साथ कार्यरत टीचर सुमंत भास्कर और चंद्रिका सिंह यादव को कोर्ट के आदेश पर पेंशन मिल रही है. उन्होंने विभाग से पूछा कि जब दो टीचर्स को पेंशन मिल रही है, तो उन्हें क्यों नहीं मिल रही? इस बात की जानकारी होते ही शिक्षा विभाग एक्टिव हो गया. गाजीपुर कोषागार विभाग और उप निदेशक वाराणसी ने संयुक्त जांच की, जिसमें 8 टीचर्स दोषी पाए गए हैं. ये लोग फर्जी पीपीओ सर्टिफिकेट लगाकर दो सालों से पेंशन ले रहे थे. उपनिदेशक ने इन टीचर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं.




