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डॉलर के सामने फिर ताकतवर बनेगा अपना रुपया! भारतीय करेंसी में जान फूंकने के लिए RBI ने बनाया ये ‘मास्टरप्लान’

भारतीय करेंसी की सेहत इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रही है. डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गोते लगा रहा है और अब यह 97 के ऐतिहासिक निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है. आम आदमी की जिंदगी पर इसका सीधा असर महंगाई के रूप में पड़ता है, क्योंकि जब रुपया कमजोर होता है तो विदेशों से आने वाला हर जरूरी सामान महंगा होने लगता है. रुपये की इस लगातार गिरती साख ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माथे पर भी चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं. हालात को काबू में करने के लिए आरबीआई के भीतर बैठकों का दौर तेज हो गया है.

डॉलर के सामने फिर ताकतवर बनेगा अपना रुपया! भारतीय करेंसी में जान फूंकने के लिए RBI ने बनाया ये ‘मास्टरप्लान’
डॉलर के सामने फिर ताकतवर बनेगा अपना रुपया! भारतीय करेंसी में जान फूंकने के लिए RBI ने बनाया ये ‘मास्टरप्लान’

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर RBI को पूरा भरोसा

मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक, रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा सहित शीर्ष अधिकारियों ने कई अहम आंतरिक बैठकें की हैं. नीति निर्माताओं के बीच यह चिंता साफ तौर पर देखी जा रही है कि रुपये में उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से गिरावट आ रही है. हालांकि, आरबीआई का स्पष्ट रूप से मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू अब भी बेहद मजबूत हैं और हमारा बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित है. असली समस्या यह है कि अर्थव्यवस्था की यह मजबूती फिलहाल विदेशी मुद्रा बाजार की विनिमय दर में दिखाई नहीं दे रही है. केंद्रीय बैंक की अब सबसे बड़ी प्राथमिकता किसी भी तरह रुपये को और गिरने से रोकना है.

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रुपये में तेजी लाने के लिए RBI का ‘मास्टरप्लान’

रुपये को फिर से मजबूती देने और विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए आरबीआई के पास एक बेहद शानदार एक्शन प्लान तैयार है. आइए समझते हैं कि आरबीआई कैसे रुपये में तेजी ला सकता है.

  1. एनआरआई (NRI) डिपॉजिट स्कीम का ब्रह्मास्त्र: विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए आरबीआई अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए एक बेहद आकर्षक जमा योजना (Deposit Scheme) ला सकता है. साल 2013 के ‘टेपर टैंट्रम’ के दौरान भी भारत ने ऐसा ही सफल कदम उठाया था, तब करीब 30 अरब डॉलर भारत आए थे. इस बार आरबीआई का अनुमान है कि नई स्कीम के जरिए देश में 50 अरब डॉलर तक का भारी-भरकम निवेश आ सकता है. जब इतनी बड़ी मात्रा में डॉलर भारत आएंगे, तो बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ेगी और रुपया अपने आप मजबूत हो जाएगा.
  2. ब्याज दरों (Interest Rates) में बढ़ोतरी का दांव: आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आगामी 3 से 5 जून को होने वाली है. इस साल अब तक बेंचमार्क दर 5.25% पर स्थिर है. अगर आरबीआई ब्याज दरों में इजाफा करता है, तो भारत में निवेश करने पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाएगा. इससे विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों की तरफ तेजी से आकर्षित होंगे और डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा.
  3. सॉवरेन डॉलर बॉन्ड जारी करना: आरबीआई और सरकार मिलकर विदेशी बाजारों से डॉलर जुटाने के लिए सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचने पर भी विचार कर रहे हैं. यह अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे विदेशी मुद्रा जुटाने का एक बेहद सुरक्षित और कारगर तरीका है, जिससे रुपये को तुरंत और मजबूत बैकअप मिलता है.
  4. डॉलर स्वैप नीलामी (Dollar Swap Auction): बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) को दुरुस्त रखने और डॉलर रिजर्व को तात्कालिक रूप से मजबूत करने के लिए आरबीआई ने बुधवार को ही 5 अरब डॉलर की स्वैप नीलामी का सफल ऐलान किया है. जानकारों का मानना है कि जरूरत पड़ने पर आरबीआई ऐसी और नीलामियां कर सकता है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहे.

विदेशी निवेशकों की होगी वापसी

यह सच है कि अमेरिका और भारत के बीच ब्याज दरों का अंतर पिछले एक दशक के निचले स्तर पर आ गया था, जिसकी वजह से साल 2026 में विदेशी निवेशकों ने कुछ पैसा (लगभग 19 अरब डॉलर) बाजार से निकाला. लेकिन, जानकारों का मानना है कि आरबीआई के एक्शन के बाद ये अंतर फिर से भारत के पक्ष में हो जाएगा. जैसे ही भारतीय बॉन्ड बाजार ज्यादा मुनाफा देने लगेगा, विदेशी निवेशक दोगुनी तेजी से भारतीय बाजार में वापसी करेंगे.

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