
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। मऊ की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर सीट विधायकों के निधन के बाद से खाली पड़ी हैं, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अब तक उपचुनाव की तारीखों का कोई ऐलान नहीं किया गया है। सबसे ज्यादा चर्चा घोसी सीट को लेकर हो रही है, क्योंकि इस सीट को रिक्त हुए अगले सप्ताह छह महीने पूरे हो जाएंगे। आमतौर पर नियमों के तहत किसी भी खाली विधानसभा सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी माना जाता है। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम जारी न होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की चुप्पी और वोटर लिस्ट रिवीजन की प्रक्रिया के बाद भी देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
तीन सीटों पर होना है उपचुनाव
प्रदेश की जिन तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें मऊ जिले की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर सीट शामिल हैं। घोसी से समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह का 20 नवंबर 2025 को निधन हो गया था। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सीट को रिक्त घोषित करते हुए इसकी सूचना चुनाव आयोग को भेज दी थी।
वहीं फरीदपुर से भाजपा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का जनवरी के पहले सप्ताह में निधन हुआ था, जबकि दुद्धी से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह का जनवरी के दूसरे सप्ताह में देहांत हो गया था। दोनों सीटों के रिक्त होने की सूचना भी जनवरी में ही चुनाव आयोग को भेज दी गई थी।
घोसी सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा
तीनों सीटों में सबसे ज्यादा नजरें घोसी विधानसभा सीट पर टिकी हुई हैं। इसकी वजह यह है कि इस सीट को खाली हुए अगले सप्ताह छह महीने पूरे हो जाएंगे। बावजूद इसके अब तक न तो चुनाव की अधिसूचना जारी हुई है और न ही कोई कार्यक्रम घोषित किया गया है।
राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर चुनाव आयोग इन सीटों पर उपचुनाव कराने में देरी क्यों कर रहा है। खासतौर पर तब, जब हाल ही में दूसरे राज्यों में खाली हुई सीटों पर उपचुनाव कराए जा चुके हैं।
वोटर लिस्ट रिवीजन बना देरी की वजह?
सूत्रों के मुताबिक यूपी में उपचुनाव टलने की सबसे बड़ी वजह वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR माना जा रहा है। प्रदेश में अक्टूबर के आखिर में शुरू हुई यह प्रक्रिया दो बार आगे बढ़ाई गई थी।
चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित कर दी थी। हालांकि इस प्रक्रिया को पूरा हुए भी एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद उपचुनाव को लेकर कोई हलचल दिखाई नहीं दे रही। यही कारण है कि अब उपचुनाव को लेकर संशय और ज्यादा गहरा गया है।
कानून क्या कहता है?
उपचुनावों की समय सीमा और उससे जुड़े अपवादों का प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 150 और 151A में किया गया है।
धारा 150 के अनुसार यदि किसी विधानसभा सीट पर रिक्ति होती है तो चुनाव आयोग अधिसूचना जारी कर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराएगा। वहीं धारा 151A में कहा गया है कि रिक्त सीट को भरने के लिए छह महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना चाहिए।
हालांकि कानून में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं। यदि विधानसभा का बचा हुआ कार्यकाल एक साल से कम हो या केंद्र सरकार से परामर्श के आधार पर आयोग को लगे कि चुनाव कराना संभव नहीं है, तो उपचुनाव टाले जा सकते हैं।
यूपी विधानसभा का अभी लंबा कार्यकाल बाकी
उत्तर प्रदेश विधानसभा की पहली बैठक 23 मई 2022 को हुई थी। इसी आधार पर वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक माना जाएगा। यानी अभी विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में एक साल से ज्यादा समय बाकी है।
ऐसे में नियमों के मुताबिक तीनों सीटों पर उपचुनाव कराना जरूरी माना जा रहा है। फरीदपुर और दुद्धी सीटों को खाली हुए करीब चार महीने हुए हैं, लेकिन घोसी सीट के मामले में छह महीने की समय सीमा लगभग पूरी होने वाली है।
चुनाव आयोग की चुप्पी से बढ़े सवाल
उपचुनाव को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।





