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साइलेंट किलर बनता हाइपरटेंशन: रेगुलर बीपी चेकअप और जागरूकता क्यों है जरूरी?

हर साल वर्ल्ड हाईपरटेंशन डे हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है. हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि यह लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है. कई लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उनका बीपी बढ़ा हुआ है, जब तक हार्ट, ब्रेन या किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या सामने न आ जाए. यही कारण है कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना और समय रहते इसका पता लगाना बेहद जरूरी माना जाता है.

साइलेंट किलर बनता हाइपरटेंशन: रेगुलर बीपी चेकअप और जागरूकता क्यों है जरूरी?
साइलेंट किलर बनता हाइपरटेंशन: रेगुलर बीपी चेकअप और जागरूकता क्यों है जरूरी?

आज के समय में , खराब खानपान, शारीरिक एक्टिविटी की कमी, मोटापा, धूम्रपान और नींद की कमी जैसी आदतें हाई बीपी के मामलों को बढ़ा रही हैं. यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं में भी तेजी से देखी जा रही है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हाइपरटेंशन कितना आम है, डॉक्टर इसके बारे में क्या सलाह देते हैं और इसे कंट्रोल रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

हाइपरटेंशन कितना आम है और यह क्यों बन रहा है बड़ी चिंता?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं. इनमें से लगभग 44 प्रतिशत लोगों को यह तक पता नहीं होता कि उन्हें हाइपरटेंशन है. भारत में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. NFHS-5 के आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग 21.3 प्रतिशत महिलाएं और 24 प्रतिशत पुरुष हाई बीपी से प्रभावित हैं.

सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक बनी रह सकती है. इस दौरान यह धीरे-धीरे हार्ट, दिमाग, किडनी और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचा सकती है. अगर समय पर पहचान और उपचार न हो, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी डिजीज जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा काफी बढ़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ नियमित जांच को एक जरूरी आदत बनाने की सलाह देते हैं.

रेगुलर बीपी चेकअप और लाइफस्टाइल बदलाव पर क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉ. पुरुषोत्तम लाल के अनुसार, हाई बीपी अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है. तनाव, खराब नींद, मोटापा, धूम्रपान और कम शारीरिक एक्टिविटी के कारण युवा भी तेजी से प्रभावित हो रहे हैं. डॉ. आर. एस. वेंकटेसुलु का कहना है कि परिवार और कार्यस्थल दोनों को नियमित बीपी मॉनिटरिंग के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. डॉ. अभिनव श्रीवास्तव के अनुसार, लोगों को अपना बीपी नंबर उसी तरह पता होना चाहिए जैसे वे अपनी अन्य जरूरी स्वास्थ्य जानकारी जानते हैं.

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डॉक्टरों का मानना है कि केवल लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं है. समय-समय पर जांच और लाइफस्टाइल में सुधार से भविष्य के हार्ट संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

हाइपरटेंशन को कंट्रोल करने के लिए क्या करें?

डॉ. संजीव अग्रवाल के अनुसार, हाई बीपी को कंट्रोल रखने के लिए नियमित जांच, दवाओं का सही पालन और अच्छी लाइफस्टाइल बेहद जरूरी है. भोजन में नमक कम करें, ताजे फल और सब्जियां शामिल करें और प्रोसेस्ड फूड से बचें.

रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या व्यायाम करें, वजन कंट्रोल रखें, पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने का प्रयास करें. धूम्रपान, तंबाकू और अधिक शराब से दूरी बनाना भी जरूरी है. जरूरत पड़ने पर घर पर बीपी मॉनिटरिंग और नियमित फॉलोअप लंबे समय तक बेहतर कंट्रोल में मदद कर सकते हैं.

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