Washington: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया को बड़े युद्ध के डर में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक रहस्यमयी पोस्ट साझा करते हुए लिखा- “It Was The Calm Before The Storm” यानी “यह तूफान से पहले की शांति थी।” इस पोस्ट के साथ ट्रंप की एक AI-जनरेटेड तस्वीर भी साझा की गई, जिसमें वह अमेरिकी नौसेना के जहाज पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पीछे समुद्र में युद्धपोत और ईरानी झंडे नजर आ रहे हैं। इस पोस्ट ने वैश्विक स्तर पर नए युद्ध की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन “Operation Epic Fury” नाम के संभावित सैन्य अभियान को दोबारा शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह अभियान पिछले महीने अस्थायी युद्धविराम के बाद रोक दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हवाई हमलों की योजना तैयार कर ली है। इसके अलावा अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज को ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र में गुप्त ऑपरेशन के लिए भी तैयार रखा गया है। हालांकि अधिकारियों ने माना है कि इस तरह के ऑपरेशन में भारी जोखिम और जान-माल का नुकसान हो सकता है।
ट्रंप ने चीन दौरे से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ईरान के प्रस्तावों को खारिज करते हुए कहा, “अगर मुझे पहली लाइन ही पसंद नहीं आती, तो मैं पूरा प्रस्ताव फेंक देता हूं।” इस बयान को अमेरिका के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। उधर ईरान ने भी खुली चेतावनी दी है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि अगर किसी तरह की आक्रामक कार्रवाई हुई तो ईरान की सेना “करारा जवाब” देने के लिए पूरी तरह तैयार है। तनाव का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है।
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यह दुनिया का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। किसी भी सैन्य टकराव का असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। इस बीच चीन और रूस ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। दोनों देशों ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे, तो पश्चिम एशिया में एक नया बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई देगा।





