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प्रेगनेंसी में बीपी चेक कराना क्यों है मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरी?

वर्ल्ड हाईपरटेंशन डे हर साल लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है. इस अवसर पर यह संदेश दिया जाता है कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराना और उसे कंट्रोल रखना बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है. प्रेगनेंसी के दौरान इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि गर्भावस्था में शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनका असर ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है. कई बार हाई बीपी की शुरुआत बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती है, इसलिए केवल महसूस होने वाले संकेतों के आधार पर इसका पता लगाना आसान नहीं होता.

प्रेगनेंसी में बीपी चेक कराना क्यों है मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरी?
प्रेगनेंसी में बीपी चेक कराना क्यों है मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरी?

हर एंटीनटल विजिट पर की जांच कराने से डॉक्टर मां और बच्चे की स्थिति पर बेहतर नजर रख सकते हैं. यह एक सरल, कम खर्च वाली और बेहद अहम जांच है. नियमित मॉनिटरिंग से जरूरत पड़ने पर टेस्ट और उपचार की योजना समय रहते बनाई जा सकती है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि प्रेगनेंसी में हाई बीपी क्यों खतरनाक हो सकता है.

प्रेगनेंसी में हाई बीपी क्यों खतरनाक हो सकता है?

प्रेगनेंसी के दौरान हाई बीपी जेस्टेशनल हाइपरटेंशन और प्रीक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थितियों का संकेत हो सकता है. अगर यह कंट्रोल न रहे, तो मां के दिमाग, किडनी, लिवर और ब्लड के थक्के बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. कुछ मामलों में प्लेसेंटा तक ब्लड फ्लो भी प्रभावित हो सकता है.

इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है. बच्चे की ग्रोथ धीमी हो सकती है, जन्म के समय वजन कम हो सकता है और समय से पहले या इमरजेंसी डिलीवरी की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए प्रेगनेंसी में हाई बीपी को हल्के में नहीं लेना चाहिए.

किसे बीपी की नियमित मॉनिटरिंग की ज्यादा जरूरत होती है?

जिन महिलाओं को पहले से हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा, किडनी की बीमारी या जुड़वा प्रेगनेंसी है, उन्हें नियमित बीपी जांच की अधिक जरूरत होती है. पारिवारिक इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकता है.

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ऐसी महिलाओं में डॉक्टर अधिक बार जांच, यूरिन टेस्ट और ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं, ताकि किसी भी समस्या को शुरुआती चरण में पहचाना जा सके.

प्रेगनेंसी में बीपी चेकअप क्यों जीवन बचाने वाला साबित हो सकता है?

नियमित बीपी चेकअप से डॉक्टर गंभीर समस्याओं को इमरजेंसी बनने से पहले पहचान सकते हैं. समय पर उपचार शुरू होने से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा बेहतर की जा सकती है. यह एक आसान और कम खर्च वाली जांच है, लेकिन कई बार समय पर सही निर्णय लेने में अहम भूमिका निभाती है.

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