अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निवेश की दुनिया में एक अलग ही रुतबा है. वे सिर्फ एक सफल कारोबारी नहीं, बल्कि एक बेहद चतुर निवेशक भी हैं. अगर कोई निवेशक शेयर बाजार में सुरक्षित और बेहतर रिटर्न की तलाश में है, तो ट्रंप का डायवर्सिफायड पोर्टफोलियो एक दिलचस्प केस स्टडी हो सकता है. वे अपनी पूंजी केवल इक्विटी तक सीमित नहीं रखते, बल्कि बॉन्ड्स, ईटीएफ (ETF) और इंडेक्स फंड्स में भी पैसा लगाते हैं. हाल ही में यूएस ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स ने उनके मार्च तिमाही के वित्तीय लेन-देन का जो पूरा-चिट्ठा पेश किया है.

टेक शेयरों में जमकर निवेश
सरकारी खुलासे के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में ट्रंप ने बाजार में भारी-भरकम पूंजी झोंकी है. यह रकम करीब 22 करोड़ से लेकर 75 करोड़ डॉलर के बीच आंकी गई है. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी शेयर बाजार की दिग्गज कंपनियों में हजारों सौदे किए. उनका सबसे ज्यादा फोकस टेक्नोलॉजी व सेमीकंडक्टर सेक्टर पर रहा. जब बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कुछ अनिश्चितताएं थीं, तब कई बेहतरीन सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर गोता लगा रहे थे. ट्रंप ने उसी गिरावट का फायदा उठाया. उन्होंने सस्ते मूल्यांकन पर एनवीडिया (Nvidia), एप्पल (Apple), इंटेल (Intel), ब्रॉडकॉम (Broadcom) से लेकर ओरेकल (Oracle) जैसे दिग्गजों के शेयर अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर लिए. बाद में इन्हीं सॉफ्टवेयर शेयरों ने बाजार में शानदार तेजी दर्ज की.
खरीदारी की टाइमिंग पर उठे सवाल
एक तरफ ट्रंप के निवेश के तरीके की तारीफ हो रही है, तो दूसरी तरफ उनके कुछ सौदों की टाइमिंग जांच के घेरे में आ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने फरवरी महीने में बोइंग (Boeing) के साथ-साथ एनवीडिया के 10 लाख से 50 लाख डॉलर तक के शेयर खरीदे थे. अब विवाद इस बात पर है कि इन दोनों ही कंपनियों को उनकी संभावित चीन यात्रा से सीधा व्यावसायिक फायदा मिल सकता है. ऐसे में बाजार के गलियारों में इस बात को लेकर बहस तेज है कि शेयरों की यह खरीदारी महज बाजार की समझ थी या फिर कुछ और.
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सही समय पर काटा मुनाफा
पेशेवर निवेशक की तरह ट्रंप ने सिर्फ खरीदारी पर जोर नहीं दिया, बल्कि सही समय पर मुनाफा भी काटा. पहली तिमाही में उन्होंने टेक जगत की तीन सबसे बड़ी कंपनियों, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजॉन, मेटा प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) के शेयरों में भारी बिकवाली की. इन सौदों का आकार 50 लाख से 2.5 करोड़ डॉलर के बीच बताया जा रहा है. हालांकि, इस सरकारी फाइलिंग में इस बात का जिक्र नहीं है कि उन्होंने ये शेयर किस भाव पर खरीदे थे या इस पूरी बिकवाली में उन्हें कुल कितना शुद्ध मुनाफा हुआ.
हितों के टकराव का मुद्दा गरमाया
जैसे ही इस बड़े पोर्टफोलियो की जानकारी सार्वजनिक हुई, हितों के टकराव को लेकर सवाल खड़े होने लगे. इस पर व्हाइट हाउस को तुरंत आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा. व्हाइट हाउस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप की सारी संपत्तियां एक ट्रस्ट में रखी गई हैं, जिसका पूरा नियंत्रण उनके बच्चों के हाथों में है. दलील दी गई है कि निवेश से जुड़े सारे फैसले पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं.





