Shubhendu Adhikari Jai Shri Ram slogan: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनते ही शपथ ग्रहण समारोह में जाते समय हजारों लोग जय श्री राम का नारा लगाते नजर आए. एक तरह से उस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच राज्य में बीजेपी की पहली सरकार का आगाज हुआ. 9 मई को सरकार बनने के बाद आज दूसरी बार शुभेंदु अधिकारी के सामने जय श्री राम के नारे लगे तो उन्होंने नारे लगाने वालों को शांत करा दिया. इस तरह से करीब हफ्तेभर यानी 7 दिन के भीतर ये दूसरा मौका था, जब ऐसा हुआ, अब इसके मायने निकाले जा रहे हैं.

शुक्रवार को क्या हुआ?
शुभेंदु अधिकारी 15 मई को राज्य के SSKM अस्पताल पहुंचे. काफिले के प्रवेश करते ही वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने जय श्री राम के नारे लगाने शुरू कर दिए. अस्पताल के बाहर गूंजने लगे जय श्री राम के नारे. सुवेंदु ने गाड़ी से उतरते ही जैसे जय श्री राम के नारो को देखा तो तुरंत नारो को बंद करवाया. आपको बताते चलें कि शुक्रवार को सीएम शुभेंदु SSKM के अंदर पहली बात बैठक लेने आए थे, जिसमे राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों के अधिकारी मौजूद रहे.
पहली बार कब हुआ?
शुभेंदु अधिकारी सीएम बनने के बाद विभिन्न आयोजनों में शामिल हुए. उस दिन वह जोरासांको ठाकुरबाड़ी में पहुंचे थे. यहां कार्यक्रम में लोग ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे. इसी दौरान शुभेंदु अधिकारी ने लोगों को चुप कराया और कहा कि वह सबके मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने ये भी कहा कि यह राजनीतिक खींचतान का समय नहीं है. आपको बताते चलें कि शुभेंदु अधिकारी बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के कुछ ही मिनट बाद रवींद्रनाथ टैगोर की 166वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके पैतृक घर जोरसांको ठाकुरबाड़ी गए थे. उन्होंने कहा कि आगे बहुत बड़ी जिम्मेदारियां हैं. जो लोग राजनीतिक खींचतान करना चाहते हैं, वे करते रहें, हम आगे बढ़ेंगे.
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क्यों रुकवाया जय श्री राम का नारा?
राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है. राज्य में बीजेपी के आगे कई चुनौतियां हैं. बीजेपी कई वादे करके सत्ता में आई है. ऐसे में अगर नारों में वक्त जाया हुआ तो काम पर असर पड़ सकता है. हालांकि जय श्री राम के नारे पर बीजेपीवालों या राष्ट्रवादी हिंदुओं का कॉपी राइट नहीं है, कोई भी सनातनी जय श्री राम का नाम और नारा लगा सकता है. लेकिन अगर बीजेपी की नई सरकार में जय श्री राम के नारे लगते रहे या जानबूझकर भीड़ भेजकर लगवाए गए तो टीएमसी के नेता ये कह कर शुभेंदु सरकार को घेर सकते हैं कि इनसे काम तो हो नहीं पा रहा है. जय श्री राम का नारा लगवाकर पल्ला झाड़ रहे हैं.
40 साल वामपंथ और 15 साल के टीएमसी के राज का निचोड़ क्या निकला?
एक वजह ये भी हो सकती है कि चुनावों के दौरान बीजेपी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के मुहं से कई बार ये तथ्य सुनने को मिला. जिसमें उनका कहना था कि दशकों पहले वामपंथियों की सरकार में सत्ता पोषित गुंडे लाल झंडा उठाकर घूमते थे. उन्होंने अंग्रेजों के जमाने में भारत की राजधानी कोलकाता और कभी देश की इंडस्ट्रियल राजधानी माने जाने वाले पश्चिम बंगाल के उद्योग-धंधों का सत्यानाश करा दिया. आगे चलकर नंदीग्राम आंदोलन के नाम पर जनता को ममता बनर्जी के रूप में नई नायिका दिखी तो उन्होंने टीएमसी को 15 साल तक मौका दिया. हालांकि ममता राज के कामकाज और नीतियों का स्कैन हुआ तो पता चला कि वामपंथ के प्रोटेक्शन में जो लोग लाल झंडा उठाकर गुंडई करते थे यानी रंगदारी वसूलते थे, सरकार बदलते ही उन्होंने टीएमसी का झंडा उठाया. 15 साल में टीएमसी से जुड़े लोगों ने बंगाल को सिर पर उठा रखा था.
अब शुभेंदु अधिकारी को यह डर हो सकता है कि ये झंडे और नारे वाली संस्कृति सत्ता से जुड़े लोगों के आस-पास रही तो टीएमसी का झंडा उठाकर घूमने वाले बीजेपी का झंडा उठाकर जय श्री राम का नारा लगाकर अपनी दुकान चलाने लगेंगे तो इससे बीजेपी की छवि को नुकसान पहुंचेगा. इसलिए शुभेंदु ऐसा माहौल बना रहे हैं कि बंगाल की 7 करोड़ जनता को ये लगे कि शुभेंदु सिर्फ जय श्री राम का नारा लगाने वालों या बीजेपी वालों के ही मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि सबके मुख्यमंत्री हैं. इस कल्चर से पार्टी और सरकार की छवि खराब होने की संभावनाओं के चलते शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के हफ्ते भर के भीतर दूसरी बार जय श्री राम का नारा लगाने वालों को रोका.





