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Vat Savitri Vrat Date: पंचांग अनुसार जानें व्रत की Correct Date, क्या है Puja का सबसे शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को वट सावित्री व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन सावित्री ने अपने सतीत्व और दृढ़ संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे। लेकिन इस बार महिलाओं के मन में वट सावित्री व्रत की तारीख को लेकर कंफ्यूजन बनी है। ऐसे में आज इस आर्टिकलके जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि 15 या 16 मई कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत। इसके साथ ही व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में भी जानेंगे। 

तिथि और समय 

Vat Savitri Vrat Date: पंचांग अनुसार जानें व्रत की Correct Date, क्या है Puja का सबसे शुभ मुहूर्त
Vat Savitri Vrat Date: पंचांग अनुसार जानें व्रत की Correct Date, क्या है Puja का सबसे शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक 16 मई की सुबह 05:11 मिनट पर ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत होगी। वहीं 17 मई की रात 01:30 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत किया जाएगा। इस दौरान महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करके अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

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शुभ मुहूर्त

बता दें कि 16 मई 2026 की सुबह पूजा के लिए कई तरह के शुभ योग का निर्माण हो रहा है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:07 मिनट से लेकर 04:48 मिनट तक रहेगा। वहीं दोपहर 02:04 मिनट से लेकर 03:28 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। फिर शाम को 07:04 मिनट से 07:25 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप वटवृक्ष की पूजा और परिक्रमा कर सकते हैं। 

पूजन विधि

सुबह स्नान के बाद महिलाएं नए वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। वहीं पूजा की थाली में रोली, धूप, दीप, अक्षत, फल, कच्चा सूत और भीगे हुए चने रखें। इसके बाद सत्यवान और सावित्री की कथा सुनी जाती है। फिर पूजा के आखिरी में बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत को पूरा किया जाता है। इस दिन आटे के गुलगुले और कई तरह के पकवान बनाने की परंपरा है।

महत्व

धार्मिक शास्त्रों में बरगद के पेड़ को पूजनीय माना जाता है। क्योंकि इस पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव तीनों देवों का वास होता है। बरगद के पेड़ की पूजा करके महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार के लिए सुख-समृद्धि मांगती हैं। पूजा के दौरान वट वृक्ष पर सूत का धागा लपेटा जाता है। वहीं वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

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