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फ्री IPL टिकट के नाम पर चल रहा तगड़ा स्कैम, फर्जी वेबसाइट्स के जाल में ऐसे फंस रहे हैं भोले-भाले फैंस

भारत में आईपीएल का मतलब सिर्फ क्रिकेट नहीं है. यह रातों की नींदें उड़ा देने वाले ग्रुप चैट्स, आखिरी मिनट में जर्सी खरीदने की होड़ और चंद सेकंड में बिक जाने वाले टिकटों की जद्दोजहद का नाम है. आपकी इसी हड़बड़ी और जज्बात का फायदा इस सीजन साइबर ठग बड़े पैमाने पर उठा रहे हैं. साइबर सुरक्षा फर्म क्लाउडसेक (CloudSEK) की ताजा रिपोर्ट ‘हिट विकेट’ (Hit Wicket) एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करती है. इस रिपोर्ट के अनुसार, 600 से अधिक फर्जी टिकट डोमेन और 400 से ज्यादा मालवेयर युक्त स्ट्रीमिंग साइट्स के साथ, आईपीएल 2026 साइबर अपराधियों के लिए भारत में एक बड़ा मौसमी बाजार बन गया है.

फ्री IPL टिकट के नाम पर चल रहा तगड़ा स्कैम, फर्जी वेबसाइट्स के जाल में ऐसे फंस रहे हैं भोले-भाले फैंस
फ्री IPL टिकट के नाम पर चल रहा तगड़ा स्कैम, फर्जी वेबसाइट्स के जाल में ऐसे फंस रहे हैं भोले-भाले फैंस

फर्जी टिकट बुकिंग साइट्स का मायाजाल

धोखेबाज आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स की हूबहू नकल कर रहे हैं. बुकमायशो (BookMyShow) और डिस्ट्रिक्ट (District) जैसे जाने-माने ब्रांड्स के लेआउट व कलर स्कीम चुराकर फर्जी साइट्स तैयार की जा रही हैं. ग्राहकों में जल्दबाजी पैदा करने के लिए इन साइट्स पर ‘काउंटडाउन टाइमर’ और ‘लिमिटेड सीट्स’ जैसे बैनर लगाए जाते हैं. इनका प्रचार इंस्टाग्राम रील्स, फेसबुक पोस्ट और गूगल सर्च के जरिए बेहद आक्रामक तरीके से किया जा रहा है.

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जैसे ही कोई यूपीआई (UPI) या कार्ड से पेमेंट करता है, उसे सीट नंबर और क्यूआर (QR) कोड वाला एक शानदार पीडीएफ टिकट मिल जाता है. लेकिन असली खेल स्टेडियम के गेट पर समझ आता है, जब क्यूआर कोड स्कैन ही नहीं होता और पता चलता है कि बुकिंग आईडी पूरी तरह फर्जी है. रिसर्च में सामने आया है कि इन ठगों का अपना ‘ऑपरेशंस डैशबोर्ड’ है, जहां से वे मांग के अनुसार टिकट की कीमतें बदलते हैं. इस दौरान वे ग्राहकों का कीमती डेटा (फोन नंबर, ईमेल) भी चुरा लेते हैं, जिसे भविष्य में अन्य फ्रॉड के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. विज्ञापनों को ट्रैक करने के लिए वैध ई-कॉमर्स कंपनियों की तरह मेटा पिक्सल (Meta Pixel) का भी इस्तेमाल हो रहा है.

फ्री मैच दिखाने के नाम पर डिवाइस में सेंधमारी

हर डिजिटल फ्रॉड सीधे पैसे नहीं मांगता; कुछ को सिर्फ आपके एक क्लिक की जरूरत होती है. जो लोग महंगे सब्सक्रिप्शन से बचने के लिए ‘फ्री आईपीएल लाइव स्ट्रीम’ खोजते हैं, वे सबसे बड़े खतरे में हैं. टेलीग्राम और रेडिट पर ऐसे दर्जनों लिंक शेयर किए जा रहे हैं. जब आप इन लिंक्स पर क्लिक करते हैं, तो क्रिकेट मैच की जगह एक खतरनाक मालवेयर आपके सिस्टम में प्रवेश कर जाता है.

क्लाउडसेक के शोधकर्ताओं ने पाया कि मैकओएस (macOS) यूजर्स को फर्जी सिक्योरिटी अपडेट के जरिए ‘शब स्टीलर’ (SHub Stealer) नाम के मालवेयर का शिकार बनाया जा रहा है. यह सॉफ्टवेयर आपके ब्राउजर के पासवर्ड, कुकीज, बैंकिंग डिटेल्स, टेलीग्राम सेशन्स और यहां तक कि क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट तक को खाली कर सकता है. यह केवल पाइरेसी का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से संगठित हैकिंग नेटवर्क है जो आपके डिवाइस का रिमोट एक्सेस हासिल कर लेता है.

साइबर अपराधियों के लिए मुनाफे का सौदा है आईपीएल

आईपीएल देश के सबसे बड़े डिजिटल इवेंट्स में से एक है. करोड़ों की व्यूअरशिप और बेहद कम समय में बड़े स्तर पर होने वाले ऑनलाइन ट्रांजेक्शन इसे ठगों के लिए एक आदर्श जगह बनाते हैं. जब बात किसी बड़े प्लेऑफ या हाई-वोल्टेज मैच की होती है, तो दर्शक भावनात्मक रूप से टिकट के लिए कोई भी जोखिम लेने को तैयार रहते हैं. धोखाधड़ी का यह पूरा इकोसिस्टम टूर्नामेंट के साथ ही काम करता है. ठग पहला मैच शुरू होने से बहुत पहले ही अपने फर्जी डोमेन और टेलीग्राम चैनल सेट कर लेते हैं और डिमांड के अनुसार अपनी रणनीति बदलते रहते हैं.

डिजिटल ठगी से बचने के उपाय

इस पूरे स्कैम इकोनॉमी से बचने का एक ही तरीका है, सतर्कता. टिकट हमेशा आधिकारिक और वेरिफाइड प्लेटफॉर्म्स से ही खरीदें. सोशल मीडिया, वॉट्सऐप या टेलीग्राम पर आए अनजान लिंक्स पर भारी डिस्काउंट देखकर बिल्कुल क्लिक न करें. इसके अलावा, अनधिकृत फ्री स्ट्रीमिंग साइट्स से पूरी तरह दूरी बनाएं, क्योंकि ये साइट्स अब आपके डिवाइस का कंट्रोल हैकर्स के हाथ में सौंपने का काम कर रही हैं. अपने ईमेल और बैंकिंग ऐप्स पर ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (2FA) जरूर ऑन रखें और अनजाने ऐप्स को अनावश्यक परमिशन न दें. याद रखें, इस डिजिटल दौर में आपका एक गलत क्लिक आपके मैच के टिकट से कहीं ज्यादा भारी पड़ सकता है.

khabarmonkey@gmail.com

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