देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। उनके इस बयान के बाद आम लोगों और बाजार दोनों की चिंता बढ़ गई है।

स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान RBI गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ता है।
अभी तक सरकार ने नहीं बढ़ाए दाम
हालांकि फरवरी से जारी संकट के बावजूद सरकार ने अब तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा। RBI गवर्नर ने कहा कि यह सिर्फ समय की बात हो सकती है, जब सरकार इन बढ़ी हुई लागतों का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाए।
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रुपये पर भी बढ़ रहा दबाव
तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिल रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 95 के नीचे पहुंच गया है। कमजोर रुपया आयात को और महंगा बना देता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की लागत और बढ़ सकती है।
पीएम मोदी ने की थी बचत की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही लोगों से ईंधन की खपत कम करने और जरूरी चीजों का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील कर चुके हैं। सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और आर्थिक दबाव कम करने के लिए कई कदमों पर विचार कर रही है। वहीं, अगर पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं, तो इसका असर सिर्फ वाहन चलाने वालों पर ही नहीं पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।





