Rupee vs USD: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव से डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. मंगलवार (12 मई) का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक रहा. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 35 पैसे टूटकर 95.63 के अब तक के रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दाम में लगातार आ रही तेजी से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. आइए जानते हैं रुपये में गिरावट का कारण-

रुपये में क्यों आ रही गिरावट?
डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही इस गिरावट का अहम कारण वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और युद्ध विराम की कमजोर होती उम्मीद है. दरअसल, जैसे ही इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत में उछाल आया, आयात पर निर्भर इंडियन इकोनॉमी पर दबाव बढ़ गया. पिछले हफ्ते रुपया डॉलर के मुकाबले 95.43 के लेवल पर था. लेकिन तेल की बढ़ती कीमत ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया और रुपये को नए रिकॉर्ड लेवल पर धकेल दिया.
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ट्रंप के बयान से फिर बढ़ी दुनिया की धड़कन
रुपये पर यह दबाव फरवरी के आखिर में शुरू हुए ईरान संघर्ष के बाद से ही बना हुआ है. हालांकि बीच-बीच में आरबीआई (RBI) की तरफ से हस्तक्षेप करके रुपये को संभालने की कोशिश की गई है. 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर सहमति बनी लेकिन हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दिये गए बयान ने बाजार में फिर से डर का माहौल बन दिया. ट्रंप ने सोमवार को कहा कि सीजफायर अब ‘लाइफ सपोर्ट’ पर है, यानी यह कभी भी टूट सकता है.
भारत की बाहरी स्थिरता के लिए खतरे की घंटी
बाजार के जानकारों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड का रेट 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचना भारत की बाहरी स्थिरता के लिए खतरे की घंटी है. तेल महंगा होने के साथ ही भारत का आयात बिल बढ़ जाता है और डॉलर की डिमांड बढ़ जाती है. इसका सीधा असर रुपये की सेहत पर पड़ता है. पीएम मोदी की तरफ से हाल ही में ईंधन बचाने और विदेशी खर्च में कटौती करने की अपील को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. जानकारों का कहना है कि सरकार फिक्सल डेफिसिट को लेकर पहले ही सतर्क है. रुपये की इस गिरावट से सरकार की चिंता और बढ़ सकती है.





