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पूरे साल का मुनाफा खत्म कर देगा 3 महीने का नुकसान, टेंशन में पेट्रोलियम कंपनियां

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर बनाए रखने के कारण कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन में भारी गिरावट आई है। इससे देश की सरकारी खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों को पहली तिमाही में इतना बड़ा घाटा होने का जोखिम है, जिससे पूरे वित्त वर्ष का मुनाफा खत्म हो सकता है। पश्चिम एशिया में 10 हफ्ते पहले युद्ध शुरू होने के बाद से, सरकारी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने लागत से कम रेट पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है। जबकि कई अन्य देशों में राशनिंग लागू की गई या कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई। 

पूरे साल का मुनाफा खत्म कर देगा 3 महीने का नुकसान, टेंशन में पेट्रोलियम कंपनियां
पूरे साल का मुनाफा खत्म कर देगा 3 महीने का नुकसान, टेंशन में पेट्रोलियम कंपनियां

2 साल पुराने रेट पर हो रही है पेट्रोल-डीजल की बिक्री

एक सूत्र ने बताया कि देश की तीनों मार्केटिंग कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) बड़े पैमाने पर अंडर रिकवरी यानी नुकसान का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर संयुक्त रूप से रोजाना 1200 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद, पेट्रोल और डीजल की कीमतें दो साल पुराने स्तर पर बनी हुई हैं। वहीं, एलपीजी की कीमतों में मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन ये कीमतें अभी भी वास्तविक लागत से काफी कम हैं। 

पेट्रोलियम कंपनियों को कुल 1 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका

उन्होंने कहा, ”मौजूदा तेल कीमतों पर, चालू तिमाही (अप्रैल-जून) में हुए नुकसान से कंपनी का पूरे साल का लगभग 76,000 करोड़ रुपये का मुनाफा खत्म हो जाएगा।” सूत्र ने कहा कि संकट के पहले महीने (मार्च) में हुए नुकसान को भी शामिल करने पर कुल नुकसान लगभग 1 लाख करोड़ रुपये बैठता है। पेट्रोलियम कंपनियां वर्तमान में पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और खाना पकाने की गैस (एलपीजी) पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही हैं। 

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लंबे समय तक सुधार नहीं हुआ बिगड़ सकते हैं हालात

इस बारे में इक्रा लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ”वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उत्पादों की ऊंची कीमतों के कारण पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां ईंधन और घरेलू एलपीजी बिक्री पर भारी घाटा उठा रही हैं। इक्रा का अनुमान है, ”120 से 125 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल की कीमतों पर मार्केटिंग कंपनियों को ईंधन और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का घाटा होता है। इस स्तर का नुकसान कंपनियों के लिए टिकाऊ मामला नहीं है और अगर कच्चे तेल और अन्य उत्पादों की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इस पर ध्यान देना होगा।” 

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