अमेरिका ने ग्लोबल तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए बड़ा दांव खेला है. ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को ऐलान किया कि वह Strategic Petroleum Reserve (SPR) से 53.3 मिलियन बैरल कच्चा तेल ऊर्जा कंपनियों को उधार देगा. इस कदम का उद्देश्य ईरान-इजराइल युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के कारण बढ़ती तेल कीमतों को काबू में रखना है.
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ऊर्जा विभाग यानी DOE के मुताबिक ExxonMobil, Trafigura और Marathon Petroleum Company सहित नौ कंपनियों ने SPR से तेल उधार लेने के लिए आवेदन किया है. हालांकि विभाग द्वारा पिछले महीने उपलब्ध कराए गए 92.5 मिलियन बैरल तेल में से केवल 58% ही लिया गया. इससे पहले भी अमेरिका इस वसंत में करीब 80 मिलियन बैरल तेल जारी कर चुका है.
यह फैसला इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के सदस्य देशों के साथ हुए एक वैश्विक समझौते का हिस्सा है. मार्च में 30 से अधिक देशों ने सहमति जताई थी कि जरूरत पड़ने पर रणनीतिक भंडार से तेल जारी किया जाएगा, ताकि वैश्विक सप्लाई बाधित होने की स्थिति में बाजार को स्थिर रखा जा सके. IEA के प्रमुख Fatih Birol ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा युद्ध दुनिया के लिए अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सप्लाई में रुकावट जारी रही तो एजेंसी और अधिक रणनीतिक भंडार जारी करने के लिए तैयार है. IEA सदस्य देश अब तक अपने उपलब्ध भंडार का लगभग 20% हिस्सा जारी कर चुके हैं.
कंपनियों के वापस करना होगा यह तेल
DOE के अनुसार कंपनियों को दिया जा रहा यह तेल बाद में कच्चे तेल के रूप में लौटाना होगा. इसके अलावा कंपनियों को 24% तक का प्रीमियम भी देना पड़ेगा. सरकार का कहना है कि इससे बाजार में स्थिरता आएगी और करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. फिलहाल SPR में करीब 384 मिलियन बैरल तेल मौजूद है, जो दुनिया की केवल चार दिनों की खपत के बराबर माना जाता है. ऐसे में वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने पर अमेरिका के सामने भंडार बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ सकती है.





