उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट में हंसराज विश्वकर्मा भी शामिल हो गए हैं. उन्होंने रविवार को मंत्री पद की शपथ ली. हंसराज के साथ ही योगी सरकार में बनारस (काशी) के चार मंत्री हो गए हैं. योगी सरकार में ये भी एक नया रिकॉर्ड है. इससे पहले योगी सरकार के पहले कार्यकाल में लखनऊ शहर से तीन मंत्री उनकी कैबिनेट में शामिल थे. बनारस ने लखनऊ को पीछे छोड़ते हुए ये नया रिकॉर्ड बनाया है.

योगी सरकार के पहले कार्यकाल में लखनऊ से बृजेश पाठक, आशुतोष टंडन और दिनेश शर्मा मंत्रिपरिषद के सदस्य थे. जबकि योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे विस्तार के बाद बनारस से चार मंत्री हैं. इनमें दयाशंकर मिश्र (ब्राह्मण), अनिल राजभर (ओबीसी), रविन्द्र जायसवाल (ओबीसी) और अब नए मंत्री हंसराज विश्वकर्मा (ओबीसी) शामिल हैं. हालांकि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भी बनारस से तीन मंत्री रहे हैं. अनिल राजभर और रविन्द्र जायसवाल के साथ नीलकंठ तिवारी भी तब योगी सरकार में मंत्री थे.
लेकिन जब योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में नीलकंठ तिवारी को ड्राप किया गया तो उनकी जगह दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ मंत्री बनाए गएं. बताया जाता है कि इससे मंत्रियों की संख्या पर कोई फर्क नही पड़ा. लेकिन दूसरे कार्यकाल के दूसरे विस्तार के बाद हंसराज विश्वकर्मा के शामिल होने से बनारस का दबदबा लखनऊ में और बढ़ गया.
सरकार में बढ़ता ‘बनारस’ का दबदबा
राजनीतिक विश्लेषक विजय नारायण का कहना है कि बनारस से पीएम मोदी सांसद हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के जीत का अंतर कम था. इसके अलावा सपा के पीडीए की काट और गाजीपुर प्रकरण को ध्यान में रखते हुए हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है. जिससे इन तीनों कारणों का समाधान किया जा सके. जिससे 2027 चुनाव की राह आसान हो सके.
जानें बनारस के दबदबे का कारण
विजय नारायण का मानना है कि 2014 में बनारस से पीएम मोदी के सांसद बनने के बाद से ही यूपी सरकार में बनारस का दबदबा बढ़ना शुरू हो गया था. पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद ये दूसरा मौका है जब यूपी की पॉलिटिक्स में बनारस का दबदबा बढ़ा है. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद से बनारस और पूर्वांचल में प्रदर्शन को लेकर बीजेपी अलर्ट मोड पर है.
राजनीतिक विश्लेषक विजय नारायण बताते हैं कि इसी अलर्टनेस की वजह से हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है. विजय नारायण ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के महज डेढ़ लाख वोटों से जीतने और बीजेपी के काशी क्षेत्र के 13 में से दस सीटें हार जाने से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व असहज है. हार की समीक्षा में ये बात सामने आई थी कि ओबीसी वोटर्स सपा के खेमे में चले गए थे.
हंसराज विश्वकर्मा की छवि एक जमीनी नेता की है और बीजेपी को ये लगता है कि इनको मंत्री बनाने से ओबीसी मतदाताओं में अच्छा संदेश जाएगा. गाजीपुर के करंडा में हुई विश्वकर्मा समाज की युवती के मौत की घटना को लेकर विपक्ष ने बड़ा बवाल मचाया था वो भी एक कारण हो सकता है.
Khabar Monkey
पूर्वांचल में जातीय गोलबंदी बीजेपी के लिए चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार और काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्रा कहते हैं कि पूर्वांचल में जातीय गोलबंदी बीजेपी के लिए चुनौती रहेगी. बीजेपी पश्चिम में तो सांप्रदायिक ध्रुविकरण का लाभ उठा लेती है लेकिन पूरब के कास्ट पॉलिटिक्स के चक्रव्यूह को भेदना उसके लिए आसान नही है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है.
अरुण मिश्रा कहते हैं कि इसके साथ साथ वाराणसी के पुराने जमीनी नेताओं को भी संदेश दिया गया है. लेकिन हंसराज को मंत्री बनाए जाने के पीछे इन दोनों कारण से ज्यादा महत्वपूर्ण ये तथ्य है कि विश्वकर्मा समाज के लोग पूर्वांचल में एक बड़ा वोट बैंक हैं. बनारस से हंसराज विश्वकर्मा को मंत्रिपरिषद में शामिल कर के बीजेपी ने एक बड़ा दांव खेला है.





