भले ही सप्ताह के आखिर दो कारोबारी दिनों में गिरावट देखने को मिली हो, लेकिन पूरे हफ्ते में शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली है. इस हफ्ते निफ्टी 0.7 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ है. जिसमें ज़्यादातर ऑटो स्टॉक्स का योगदान रहा. जब सोमवार को घरेलू बाजार फिर से खुलेंगे, तो पूरे हफ्ते होने वाले कई अहम इवेंट्स से बाजार के मूड पर असर पड़ने की संभावना है. शुक्रवार को, 50-स्टॉक वाला इंडेक्स 150.50 पॉइंट्स, या 0.62 फीसदी नीचे गिरकर 24,176.15 पर बंद हुआ.

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने कहा कि बाजार का मूड और खराब हो गया है, क्योंकि इंडेक्स इंट्राडे टाइमफ्रेम पर 50 EMA से भी नीचे चला गया है. इसके अलावा, RSI डेली चार्ट पर फिर से बेयरिश क्रॉसओवर में आ गया है, जो बाज़ार की गति के कमजोर पड़ने का संकेत है. डे ने कहा कि कुल मिलाकर, बाजार का मूड कमजोर लग रहा है, और 24,200 के स्ट्राइक प्राइस के आस-पास भारी कॉल राइटिंग देखी जा रही है.
अगर सोमवार को निफ्टी 24,200 से नीचे बना रहता है, तो इंडेक्स में 24,05024,000 के जोन की ओर और गिरावट देखने को मिल सकती है. दूसरी ओर, अगर इंडेक्स 24,200 से ऊपर चला जाता है, तो 24,35024,400 की ओर एक छोटी अवधि की रिकवरी रैली शुरू हो सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि वो कौन से फैक्टर्स हैं, जिनकी वजह से शेयर बाजार में हलचल देखने को मिल सकती है.
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चौथी तिमाही की कमाई
हालांकि ज्यादातर निफ्टी कंपनियों ने पहले ही अपनी चौथी तिमाही की कमाई के नतीजे घोषित कर दिए हैं, लेकिन नतीजों के आधार पर होने वाली हलचल ज्यादातर बड़े बाजारों में देखने को मिलेगी. BSE में लिस्टेड 480 से ज्यादा कंपनियां अगले छह दिनों में जनवरी-मार्च तिमाही की अपनी कमाई के नतीजे घोषित करेंगी. निफ्टी पैक में टाटा मोटर्स पैसेंजर्स व्हीकल, डॉ. रेड्डीज, भारती एयरटेल, सिपला, टाटा स्टील, पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन और बजाज फिनसर्व शामिल हैं. निफ्टी से बाहर की कंपनियों में टाटा मोटर्स, पीवीआर आईनॉक्स, टाटा पॉवर, नाजरा, सेल, एमटीएआर, केनरा बैंक, फ्रैक्टल एनालिटिक्स और इंडियन होटल्स शामिल हैं.
ईरान-इजरायल वॉर
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को सुलझाने की दिशा में कोई खास संकेत नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में एक कमजोर सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच दुश्मनी जारी है. यह ताजा तनाव तब बढ़ा जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए. वहीं, अमेरिका की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि तेहरान लंबे समय तक नौसैनिक नाकेबंदी का सामना करने में सक्षम होगा. पिछले कुछ दिनों में, होर्मुज स्ट्रेट और उसके आस-पास कुछ सबसे भीषण झड़पें देखने को मिली हैं, जो पिछले महीने लागू हुए संघर्ष-विराम के बाद से सबसे ज्यादा हैं. शुक्रवार को हुए ताजा हमलों में एक बार फिर संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाया गया, जिससे इस क्षेत्र में जारी अस्थिरता और भी साफ हो गई है.
इस बीच, वॉशिंगटन अभी भी तेहरान के उस जवाब का इंतजार कर रहा है, जो अमेरिका-समर्थित एक ऐसे प्रस्ताव पर आधारित है जिसका मकसद ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं जैसे विवादित मुद्दों पर व्यापक बातचीत शुरू होने से पहले इस संघर्ष को औपचारिक रूप से खत्म करना है. शुक्रवार को रोम में बोलते हुए, विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान का जवाब उसी दिन बाद में मिल जाएगा. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने संकेत दिया कि तेहरान अभी भी इस प्रस्ताव का वैल्यूएशन कर रहा है.
अमेरिकी बाजार
शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद हुए. चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव को लेकर चिंताओं को कम करने में मदद की. इसके अलावा, अमेरिका में उम्मीद से बेहतर रोजागार के आंकड़ों ने बाजार में सकारात्मक माहौल को और मजबूत किया. जहां Dow 30 मामूली बढ़त के साथ 49,609.16 पर बंद हुआ (12.19 अंक या 0.02% की बढ़त), वहीं S&P 500 में 0.84% (61.82 अंक) की बढ़त दर्ज की गई और यह 7,398.93 पर बंद हुआ. टेक्नोलॉजी शेयरों पर आधारित Nasdaq Composite में 440.88 अंकों या 1.71% की जबरदस्त तेजी आई और यह 26,247.08 पर बंद हुआ.
कच्चा तेल
घरेलू बाजारों की दिशा तय करने में ग्लोबल बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतें एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी. शुक्रवार को अमेरिकी WTI कच्चे तेल के वायदा सौदे 94.68 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुए, जिसमें एक ही सत्र में 0.13 डॉलर या 0.14 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, ब्रेंट कच्चे तेल में 0.19 फीसदी या 0.19 डॉलर प्रति बैरल की मामूली बढ़त देखने को मिली और यह 101.29 डॉलर पर बंद हुआ.
FII और DII का निवेश
यह हफ्ता विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली के साथ समाप्त हुआ. शुक्रवार को समाप्त हुए पांच कारोबारी सत्रों के दौरान FIIs ने घरेलू शेयर बाजार से कुल 11,072 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए. मई में अब तक विदेशी निवेश का आउटफ्लो बढ़कर 14,231 करोड़ रुपए हो गया है, जिससे 2026 में कुल आउटफ्लो बढ़कर 2.06 लाख करोड़ रुपए के भारी-भरकम स्तर पर पहुंच गया है. शुक्रवार को, FIIs ने 4,110.60 करोड़ रुपए के घरेलू शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 6,748.13 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे.
रुपया बनाम डॉलर
इस हफ्ते भारतीय रुपया मजबूत हुआ, जिसकी वजह अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर शुरू हुआ शुरुआती भरोसा था. लेकिन फिर से शुरू हुई दुश्मनी ने एशियाई करेंसी के भविष्य को एक बार फिर से डांवाडोल करने का खतरा पैदा कर दिया. करेंसी पिछले बंद भाव से 0.2 फीसदी नीचे गिर गई, जबकि डॉलर-रुपए के लिए 1 महीने की अनुमानित अस्थिरता (implied volatility) बढ़कर 5.7 फीसदी हो गई, जो अप्रैल के मध्य के बाद से सबसे ज्यादा है.
एक विदेशी बैंक के ट्रेडर ने कहा कि शुक्रवार को कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा था. डॉलर के मुकाबले में रुपए को 94.40 के आस-पास लगातार सपोर्ट मिल रहा था, जबकि सरकारी बैंक 94.70 के स्तर के आस-पास सक्रिय थे. रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 94.70 तक गिर गया, लेकिन बाद में उसने अपनी गिरावट की भरपाई करते हुए 94.40 पर सत्र समाप्त किया, जो पिछले हफ्ते के मुकाबले 0.4 फीसदी ज्यादा है.
खबरों में शेयर
विभिन्न कंपनियों द्वारा की गई कॉर्पोरेट कार्रवाइयों के चलते कम से कम 20 शेयरों में विशेष हलचल देखने को मिल सकती है. अगले पांच दिन डिविडेंड भुगतान, बोनस इश्यू, स्टॉक स्प्लिट और विलय के लिए ‘एक्स-डेट’ और ‘रिकॉर्ड डेट’ होंगे. जिन शेयरों में ‘एक्स-डिविडेंड’ ट्रेडिंग होगी, उनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), मणप्पुरम फाइनेंस, प्रीमियर एनर्जीज, ओबेरॉय रियल्टी, आनंद राठी वेल्थ, एप्टस वैल्यू हाउसिंग फाइनेंस इंडिया और इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) शामिल हैं. एप्टस फार्मा, बायोजेन फार्माकेम इंडस्ट्रीज और देव लैबटेक वेंचर के बोनस इश्यू के लिए ‘रिकॉर्ड डेट’ तय की गई हैं. देव लैबटेक वेंचर के शेयरों में 15 मई को ‘एक्स-स्प्लिट’ ट्रेडिंग होगी, जबकि गुजरात स्टेट पेट्रोनेट के विलय के लिए ‘रिकॉर्ड डेट’ 12 मई है.





