Tambe Ka Kada: ज्योतिष शास्त्र में तांबे का कड़े का विशेष महत्व बताया गया है। यह धातु शुद्ध और बहुत ही शक्तिशाली मानी जाती है। तांबे का संबंध सूर्य और मंगल से होता है। ऐसे में इसे पहनने से न केवल सेहत से जुड़े फायदे मिलते हैं बल्कि आपकी सोई हुई किस्मत को भी जगा सकती है। हाथ में तांबा पहनने से कुंडली में सूर्य और मंगल दोनों ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है। तो अगर आपका सूर्य और मंगल कमजोर है तो तांबा जरूर धारण करें। चलिए जानते हैं तांबा पहनने का सही नियम के बारे में।

तांबे का कड़ा किस दिन पहनना चाहिए?
सप्ताह का रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है और तांबा का संबंध भी सूर्य देव से है। ऐसे में सूर्य की मजबूती के लिए तांबा को रविवार के दिन धारण करें। वहीं अगर आप मंगल ग्रह की शांति और मजबूती के लिए तांबा पहन रहे हैं तो इसके लिए मंगलवार का दिन शुभ रहेगा।
तांबे का कड़ा पहनने का सही नियम
- तांबा का कड़ा पहनने से पहले इस गंगाजल या शुद्ध जल में धो लें इसके बाद सूर्य देव के सामने रख दें।
- तांबा को सूर्योदय के समय पहनना अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है।
- तांबा का कड़ा पुरुषों को इसे हमेशा दाहिने हाथ में पहनना चाहिए।
- महिलाओं के लिए भी दाहिने हाथ में पहनना शुभ माना जाता है।
तांबा का कड़ा पहनने के फायदे
- तांबे का कड़ा पहनने से कार्यक्षेत्र में आर्थिक लाभ मिलता है। इसके साथ ही कारोबार में भी मुनाफा मिलता है।
- तांबे का कड़ा पहनने से सूर्य और मंगल के अशुभ प्रभाव कम होता है। क्रोध पर कंट्रोल रहता है। मान-सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- तांबे का कड़ा शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है।।
- आयुर्वेद के अनुसार, तांबा त्वचा के संपर्क में रहने से ब्लड प्रेशन को संतुलित रखने और जोड़ों के दर्द में राहत देने में सहायक हो सकता है।
तांबे का कड़ा पहनने से पहले इस बात का रखें खास ध्यान
तांबे का कड़ा खरीदते या पहनते समय इस बात का ध्यान रखें इसमें कहीं भी जोड़ नहीं होना चाहिए। कड़ा पूरी तरह से गोल और बिना किसी कट या वेल्डिंग के होना चाहिए। माना जाता है कि बिना जोड़ वाला शुद्ध तांबे का कड़ा ही शरीर की ऊर्जा को सही दिशा में प्रवाहित करता है और पूर्ण ज्योतिषीय लाभ देता है। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि कड़ा शुद्ध तांबे का होना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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