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केंद्र सरकार ने अचानक जम्मू-कश्मीर के LG को कौन-सा ‘कंट्रोल’ दे दिया? 5 प्वाइंट्स में पूरी बात जानिए

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. नए सरकारी आदेश के मुताबिक अब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) को सार्वजनिक सुरक्षा या राष्ट्रीय आपात स्थिति के दौरान टेलीकॉम सेवाओं पर नियंत्रण से जुड़े अधिकार दिए गए हैं. इस आदेश के तहत ऐसी परिस्थितियों में, जब कानून-व्यवस्था बिगड़ने या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने की आशंका होगी, तब उपराज्यपाल सीधे तौर पर दूरसंचार सेवाओं से जुड़े फैसले ले सकेंगे.

केंद्र सरकार ने अचानक जम्मू-कश्मीर के LG को कौन-सा ‘कंट्रोल’ दे दिया? 5 प्वाइंट्स में पूरी बात जानिए
केंद्र सरकार ने अचानक जम्मू-कश्मीर के LG को कौन-सा ‘कंट्रोल’ दे दिया? 5 प्वाइंट्स में पूरी बात जानिए

उपराज्यपाल के पास इस अधिकार के बाद वो सूबे में कभी भी इंटरनेट सेवाओं पर रोक, संचार नेटवर्क के संचालन या अन्य जरूरी टेलीकॉम उपाय के लिए कोई भी फैसला ले सकते हैं. सरकार का कहना है कि यह कदम संवेदनशील परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कई बार ऐसी स्थितियां सामने आती रही हैं, जहां संचार सेवाओं को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए जरूरी माना गया.

इस फैसले से उपराज्यपाल को मिल जाएंगी ये शक्तियां
इन शक्तियों के तहत उपराज्यपाल (LG) को दूरसंचार सेवाओं पर सीधे हस्तक्षेप करने का अधिकार मिल जाता है.

किसी भी सार्वजनिक आपातस्थिति या जन सुरक्षा से जुड़े खतरे की स्थिति में LG संदेशों के प्रसारण को रोक सकते हैं.

संचार को इंटरसेप्ट यानी निगरानी में लेने का आदेश दे सकते हैं.

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जरूरत पड़ने पर संदेशों को डिक्रिप्ट कराने के निर्देश भी दे सकते हैं.

इतना ही नहीं, हालात गंभीर होने पर टेलीकॉम सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला भी लिया जा सकता है.

संवेदनशील मामलों में होगा तुरंत एक्शन
जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार ने एक अहम बदलाव किया है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब उपराज्यपाल की भूमिका पहले की तुलना में और ज्यादा प्रभावशाली मानी जा रही है. खास तौर पर सुरक्षा, आपात स्थिति और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े मामलों में उपराज्यपाल को अधिक अधिकार मिलने की चर्चा है. माना जा रहा है कि इस कदम का मकसद संवेदनशील हालात में फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज करना है. जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कई बार हालात अचानक बदल जाते हैं, ऐसे में केंद्र सरकार चाहती है कि निर्णय लेने में देरी न हो और प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सके.

नई व्यवस्था से बनेगा बेहतर तालमेल
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नई व्यवस्था से केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद मिलेगी. इससे सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासनिक अधिकारियों और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच समन्वय पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है. राजनीतिक गलियारों में भी इस बदलाव को लेकर चर्चा तेज है. कुछ लोग इसे प्रशासनिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, तो वहीं विपक्षी दल इसे केंद्र के बढ़ते नियंत्रण के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह प्रशासनिक जरूरतों और बेहतर शासन व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है.

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