बढ़ते तापमान और खान-पान में लापरवाही के कारण गर्मियों में पीलिया (Jaundice) का खतरा काफी बढ़ जाता है। अक्सर लोग इसके शुरुआती संकेतों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले सकता है। पीलिया एक आम बीमारी है जिसमें शरीर, आंखें और पेशाब का रंग पीला दिखाई देने लगता हैं। यह बीमारी तब होती है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ जाता है। बिलीरुबिन लीवर में बनता है और सामान्य रूप से शरीर से बाहर निकल जाता है, लेकिन जब लीवर ठीक से काम नहीं करता तो यह शरीर में जमा होने लगता है और पीलिया हो जाता है। यह बीमारी गर्मियों में ज्यादा देखने को मिलती है।

खानपान समेत जॉन्डिस फैलाने वाले कारण
- एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झांजेर के मुताबिक गर्मियों में पीलिया का खतरा बढ़ने के लिए दूषित पानी और दूषित खाना सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। गर्मी में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं ऐसे में बाहर के कटे फल, बासी खाना या संक्रमित पानी पीने से हेपेटाइटिस A और E वायरस का खतरा बढ़ जाता है, जो पीलिया का बड़ा कारण हैं।
- डिहाइड्रेशन भी पीलिया के लिए जिम्मेदार हो सकता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
- कमजोर पाचन की वजह से भी गर्मी में पीलिया का खतरा बढ़ने लगता है। गर्मी में पाचन तंत्र धीमा हो सकता है। ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
- स्ट्रीट फूड का ज्यादा सेवन जैसे गोलगप्पे, जूस, बर्फ और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं, खासकर अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा गया हो।
पीलिया के लक्षण
- आंखों और स्किन का रंग पीला पड़ना
- गहरे रंग का पेशाब
- कमजोरी और थकान होना
- भूख कम लगना
- उल्टी या मतली होना
- पेट दर्द और बुखार होना शामिल है।
जॉन्डिस की जांच कैसे होती है?
पीलिया की पुष्टि के लिए डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाते हैं। इस टेस्ट में बिलीरुबिन और लीवर से जुड़े अन्य तत्वों की जांच की जाती है। रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर बीमारी की गंभीरता का पता लगाते हैं।
Khabar Monkey
जॉन्डिस का इलाज और घरेलू उपाय
जॉन्डिस में आराम करना सबसे जरूरी है। डाइट अहम है, इस दौरान हल्का भोजन करना जरूरी होता है। घरेलू उपायों में पपीता और पपीते के पत्तों का सेवन फायदेमंद माना जाता है। मरीज को पानी का पर्याप्त सेवन करना चाहिए। इस परेशानी में डॉक्टर मरीज को ज्यादा फल खाने की सलाह देते हैं ताकि वो आसानी से पच सकें। तला-भुना और ज्यादा तेल वाला खाना पूरी तरह से बंद करना चाहिए। ताजे फल, नारियल पानी, उबला हुआ खाना और पर्याप्त पानी इस बीमारी को रिकवर करने में मददगार साबित होता है। शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है।
जॉन्डिस से कैसे बचें?
जॉन्डिस से बचने के लिए हमेशा साफ और उबला हुआ पानी पिएं। बाहर का खुला और सड़क किनारे मिलने वाला खाना खाने से बचें। साफ-सफाई का ध्यान रखें और दूषित भोजन से दूरी बनाकर रखें। ज्यादातर मामलों में जॉन्डिस गंभीर नहीं होता और सही इलाज से ठीक हो जाता है। लेकिन लापरवाही करने पर यह लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।





