दिल्ली पुलिस ने इस साल फरवरी में पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास हुए तीन हत्याओं के मामले में एक बड़ा खुलासा करते हुए 527 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है। इस मामले में खुद को स्वयंभू जैसा बताने वाला एक व्यक्ति को ही एकमात्र आरोपी बनाया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बाबा पर कुल मिलाकर कम से कम छह लोगों की हत्या करने का आरोप है, जो उसने “धनवर्षा” नामक तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर की।

पुलिस के अनुसार, बाबा ने अपने तंत्र-मंत्र और झूठे चमत्कार दिखाकर लोगों को फंसाया और फिर उनकी जिंदगी और मौत से खेला। पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास फरवरी में जिन तीन लोगों के शव एक कार में मिले थे, उनकी पहचान रंधीर सिंह (76), शिव नरेश सिंह (47) और लक्ष्मी देवी (40) के रूप में हुई। इन तीनों को कथित रूप से “जहर मिले लड्डू” खिलाकर मारा गया था।
सलीम नाम के एजेंट ने लक्ष्मी को आरोपी से मिलवाया था
जांच में पता चला कि जहांगीरपुरी निवासी गृहणी लक्ष्मी देवी अक्टूबर 2025 में आर्थिक तंगी और पारिवारिक परेशानियों से जूझ रही थीं। उनके पति फेफड़ों की बीमारी के कारण बार-बार नौकरी से छुट्टी लेने की वजह से काम खो बैठे थे। इसी मुश्किल समय में उनकी मुलाकात सलीम नाम के व्यक्ति से हुई, जो बाबा का एजेंट था और लोगों को उससे मिलवाने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार, सलीम ने लक्ष्मी को बाबा से मिलवाया। बाबा ने लक्ष्मी को अपने चमत्कार दिखाने के लिए एक चाल चली। उसने उसका दुपट्टा लिया, उसे अपने हाथ पर लपेटा और मंत्र पढ़ते हुए उसमें पैसे के बंडल डाल दिए। जब दुपट्टा खोला गया तो उसमें सच में पैसे मिले, जिससे लक्ष्मी को विश्वास हो गया कि बाबा के पास “धनवर्षा” की शक्ति है।
इसके बाद लक्ष्मी बाबा के संपर्क में पूरी तरह आ गई और उसने अन्य परेशान महिलाओं को भी उससे मिलवाना शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार, लक्ष्मी को व्हाट्सएप ग्रुप्स में भी शामिल किया गया था, जहां वह अन्य लोगों से जुड़ी हुई थी। इन्हीं ग्रुप्स में उसकी मुलाकात नरेश से हुई, जो पहले से ही इस तांत्रिक जाल का हिस्सा था।
पुलिस को लक्ष्मी के पास से एक डायरी भी मिली, जिसमें कई महिलाओं के बारे में निजी जानकारी लिखी थी। इसमें उनके शरीर के माप, बीमारियों का रिकॉर्ड, ऑपरेशन और दवाइयों का विवरण शामिल था। इसके अलावा उसके मोबाइल फोन से कई महिलाओं की तस्वीरें भी बरामद हुईं।
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जांच में यह भी सामने आया कि कमरुद्दीन उर्फ बाबा की शुरुआत उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से हुई थी, जहां वह खुद को हकीम बताकर घरेलू बीमारियों जैसे पेट दर्द और सिरदर्द का इलाज करता था। 2010 में वह गाजियाबाद शिफ्ट हुआ और अपने दो बेटों रज्जू और समाउद्दीन के साथ रहने लगा। यहीं से उसने तंत्र-मंत्र और “धनवर्षा” जैसे अंधविश्वासी काम शुरू किए।
पुलिस के अनुसार, 2014 में राजस्थान के धौलपुर जिले के राजाखेड़ा गांव में एक महिला अनिता की हत्या का भी संबंध इसी बाबा से जुड़ा पाया गया। अनिता और उसके पति नारायण संतान न होने की समस्या लेकर बाबा के पास गए थे। बाबा ने कथित रूप से “जिन्न” बुलाकर कहा कि अनिता मां नहीं बन सकती और उसे मार देना चाहिए। इसके बाद नारायण ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। इस मामले में बाबा गिरफ्तार हुआ था लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई थी।
इसके अलावा 2025 में भी दो लोगों रामनाथ और पुरन की हत्या का आरोप बाबा पर है। इन दोनों को जहरीले मिठाई खिलाकर मारा गया था और उनके शव एक पुरानी कांच फैक्ट्री के पास मिले थे, जो बाबा के घर के पास ही थी। पुलिस का कहना है कि “धनवर्षा” एक ऐसा तांत्रिक अनुष्ठान है, जिसे कई स्वयंभू बाबा उत्तर भारत में लोगों की आर्थिक, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं का हल बताकर प्रचारित करते हैं। इसी झांसे में आकर कई लोग उनके जाल में फंस जाते हैं।
इस पूरे मामले में अब तक की जांच से साफ है कि कमरुद्दीन उर्फ बाबा ही सभी मामलों का मुख्य आरोपी है और पुलिस ने उसके खिलाफ विस्तृत 527 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया है।
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