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13 साल तक देश की सेवा करने वाला मेजर, फिर बना एक्टर, कहलाए टैलेंट का खजाना, महामारी ने ली जान

फिल्मी दुनिया में ऐसे कई कलाकारों की कमी नहीं है, जिन्होंने एक्टिंग इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले अन्य फील्ड में काम किया। कोई बिजनेसमैन तो कोई इंजीनियर रहा, लेकिन फिर इन्हें एक्टिंग का चस्का लगा और इन्होंने एक्टिंग की दुनिया का रुख कर लिया। इन्हीं अभिनेताओं में से एक थे बिक्रमजीत कंवरपाल, जो कभी भारतीय सेना में मेजर के पद पर कार्यरत रहे और सियाचिन ग्लेशियर में फौलाद की तरह डटे रहे। शौर्य उनकी रगों में बहता था। लेकिन, फिर बिक्रमजीत कंवरपाल को एक्टर बनने का शौक चढ़ा और फिर आर्मी से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अभिनय का रुख कर लिया।

13 साल तक देश की सेवा करने वाला मेजर, फिर बना एक्टर, कहलाए टैलेंट का खजाना, महामारी ने ली जान
13 साल तक देश की सेवा करने वाला मेजर, फिर बना एक्टर, कहलाए टैलेंट का खजाना, महामारी ने ली जान

पिता थे सम्मानित अधिकारी

एक्टर बिक्रमजीत कंवरपाल हिमाचल प्रदेश के सोलन से थे। उनके पिता का नाम बिक्रमजीत के पिता मेजर द्वारका नाथ कंवरपाल था, जो खुद भी भारतीय सेना के एक सम्मानित अधिकारी और ‘कीर्ति चक्र’ विजेता थे, जिसके चलते उनकी परवरिश भी आर्मी की छावनियों में हुआ। एक स्ट्रिक्ट माहौल में रहने के चलते उनके लिए अनुशासन एक लाइफस्टाइल बन चुकी थी। उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक लॉरेंस स्कूल, सनवार से पढ़ाई की और इसी दौरान उनके मन में अभिनय का ख्याल आने लगा। वह अक्सर स्कूल के नाटकों में भाग लेते थे, लेकिन जब करियर की बात आई तो पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए भारतीय सेना के ‘हॉडसन्स हॉर्स’ (आर्मर्ड कॉर्प्स) में कमीशन प्राप्त किया।

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34 की उम्र में पूरा किया एक्टर बनने का सपना

बिक्रमजीत कंवरपाल ने दुनिया के सबसे खतरनाक युद्धक्षेत्रों में से एक सियाचिन ग्लेशियर में भी अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्हें फौलादी आत्मविश्वास दिया, जिसके दम पर उन्होंने मायानगरी मुंबई की रुख किया और सभी संघर्षों का सामना करते हुए अपना एक्टर बनने का सपना पूरा किया। 13 साल तक इंडियन आर्मी में सेवा देने के बाद उन्होंने 34 की उम्र में पहली बार कैमरा फेस किया। पहली बार उन्होंने पूजा भट्ट की ‘पाप’ (2003) में काम करने का मौका मिला और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

कभी एक्टिंग सीखने की जरूरत नहीं पड़ी

बिक्रमजीत कंवरपाल उन गिने-चुने अभिनेताओं में से थे, जिन्हें कभी अभिनय सीखने की जरूरत नहीं पड़ी। अभिनय उन्हें भगवान से उपहार के तौर पर मिली थी, तभी तो कॉर्पोरेट में सीनियर वीपी’, ‘रॉकेट सिंह’ में खड़ूस बॉस और मर्डर 2 में ‘कमिश्नर’ जैसे अलग-अलग किरदार उन्होंने बिना किसी एक्टिंग कोर्स के निभा डाले। फिल्मों के साथ ही उन्होंने ओटीटी और टीवी की दुनिया में भी काम किया। स्पेशल ऑप्स, योर ऑनर, अदालत, 24 और भौकाल जैसी सीरीज में उन्होंने अपने अभिनय से सबको हैरान कर दिया।

 

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