Thursday, April 30, 2026
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OMG! टॉपर बना, 500 आवेदन किए, फिर भी नौकरी नहीं…वायरल हुई टॉपर के संघर्ष की कहानी

हर छात्र की आंखों में एक सपना होता है अच्छी पढ़ाई करो, डिग्री हासिल करो और फिर एक शानदार नौकरी मिल जाए. लेकिन जब मेहनत और सफलता के बावजूद नौकरी हाथ न लगे, तो यह सपना टूटने जैसा महसूस होता है. हाल ही में ब्रिटेन से सामने आई एक कहानी इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. 21 वर्षीय खालिद शरीफ की कहानी आज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. उन्होंने लंदन के पास स्थित किंग्स्टन यूनिवर्सिटी से डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजी में पढ़ाई की और साल 2025 में अपनी क्लास में टॉप किया. आमतौर पर टॉपर होने का मतलब होता है बेहतर अवसर, लेकिन खालिद के साथ ऐसा नहीं हुआ.

OMG! टॉपर बना, 500 आवेदन किए, फिर भी नौकरी नहीं…वायरल हुई टॉपर के संघर्ष की कहानी
OMG! टॉपर बना, 500 आवेदन किए, फिर भी नौकरी नहीं…वायरल हुई टॉपर के संघर्ष की कहानी

डिग्री पूरी करने के बाद खालिद ने नौकरी की तलाश शुरू की. उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि 500 से अधिक जगहों पर आवेदन किया. इतने बड़े प्रयास के बावजूद उन्हें केवल 20 इंटरव्यू कॉल मिले और हैरानी की बात यह है कि उनमें से किसी भी इंटरव्यू के बाद उन्हें नौकरी का ऑफर नहीं मिला. यह स्थिति किसी के लिए भी निराशाजनक हो सकती है, खासकर तब जब आपने अपनी पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन किया हो. खालिद ने अपनी पढ़ाई पर करीब 1 लाख पाउंड, यानी लगभग 1.04 करोड़ रुपये खर्च किए. इतनी बड़ी रकम लगाने के बाद भी जब नौकरी न मिले, तो मानसिक दबाव और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. खालिद खुद कहते हैं कि उन्होंने टॉप किया, फिर भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ. ऐसे में वे सोचते हैं कि जिन छात्रों के नंबर उनसे कम हैं, उनकी स्थिति कितनी मुश्किल हो सकती है.

तलाश कर रहे हैं अपने लिए मौका

इस पूरे मामले पर खालिद का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बाद नौकरी के बाजार में काफी बदलाव आया है. पहले जहां कंपनियां बड़ी संख्या में नए लोगों को मौका देती थीं, वहीं अब वे काफी सोच-समझकर भर्ती कर रही हैं. खर्च कम करने के लिए कई कंपनियां नई नियुक्तियों से बच रही हैं. इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने भी एंट्री-लेवल जॉब्स पर असर डाला है. कई ऐसे काम, जो पहले नए कर्मचारियों को दिए जाते थे, अब तकनीक के जरिए किए जा रहे हैं. खालिद का अंतरराष्ट्रीय बैकग्राउंड भी उनके लिए एक चुनौती बन गया है. उनका जन्म मिस्र में हुआ, पढ़ाई कतर में हुई और बाद में वे लंदन आ गए. उन्हें लगता है कि कंपनियां यह मान लेती हैं कि उन्हें वीजा स्पॉन्सरशिप की जरूरत होगी, जबकि वास्तव में उनके पास यूके में काम करने की पूरी अनुमति है. इस गलतफहमी के कारण भी उन्हें कई अवसरों से हाथ धोना पड़ा.

हालांकि, इतनी निराशा के बावजूद खालिद ने हार नहीं मानी है. फुल-टाइम नौकरी न मिलने के बावजूद वे खुद को व्यस्त और एक्टिव बनाए हुए हैं. वे फ्रीलांस वीडियोग्राफर और फोटोग्राफर के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें कुछ आय भी हो रही है और अपने टैलेंट को निखारने का मौका भी मिल रहा है. इसके साथ ही उन्होंने Zoque नाम से अपना कपड़ों का ब्रांड भी शुरू किया है. इस ब्रांड के जरिए वे अपने फैशन और फोटोग्राफी के शौक को एक साथ जोड़ रहे हैं. यह कदम दिखाता है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं.

खालिद की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं है, बल्कि यह आज के समय में युवाओं के सामने खड़ी बड़े चैलेंज को दर्शाती है. अच्छी शिक्षा और कड़ी मेहनत के बावजूद नौकरी मिलना अब पहले जितना आसान नहीं रहा. बदलती तकनीक, आर्थिक परिस्थितियां और कंपनियों की नई नीतियां इस स्थिति को और जटिल बना रही हैं. ये मामला इस बात पर भी सवाल उठाता है कि क्या केवल डिग्री और अच्छे अंक ही सफलता की गारंटी हैं. आज के दौर में स्किल्स, अनुभव और सही अवसर का मेल होना भी उतना ही जरूरी हो गया है.

khabarmonkey@gmail.com

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