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न माया मिली-न राम…अमेरिका और ईरान की जंग में मध्यस्थ बनने से पाकिस्तान को हो गए ये 3 नुकसान

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में मध्यस्थ (mediator) बनना पाकिस्तान के लिए मुसीबत बन गया है. एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है, वहीं दूसरी तरफ इस प्रक्रिया की वजह से पाकिस्तान को तीन बड़े नुकसान उठाने पड़े हैं. ये नुकसान पैसे, दोस्ती और प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं. पूरे मामले में सबसे ज्यादा भद सेना प्रमुख आसिम मुनीर की पिट रही है, क्योंकि मुनीर ही इस पहल के अगुवा थे.

न माया मिली-न राम…अमेरिका और ईरान की जंग में मध्यस्थ बनने से पाकिस्तान को हो गए ये 3 नुकसान
न माया मिली-न राम…अमेरिका और ईरान की जंग में मध्यस्थ बनने से पाकिस्तान को हो गए ये 3 नुकसान

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जब मध्यस्थता की प्रक्रिया में पाकिस्तान की एंट्री हुई थी, तो उसने इसे खूब भुनाया था, लेकिन दो बार वार्ता रद्द होने के बाद अब पाकिस्तान पूरी तरह बैकफुट पर है. पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इस पर कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है.

पाकिस्तान को कैसे हुआ नुकसान?

1. ब्लूमबर्ग के मुताबिक पीस डील के फेल होने से पाकिस्तान की कूटनीतिक ताकत का पता चल गया है. पाकिस्तान परमाणु संपन्न होने के बावजूद किसी देश पर दबाव नहीं डाल सकता है. अमेरिका और दोनों ने पीस डील को लेकर पाकिस्तान की बात मानने से इनकार कर दिया है. ईरान ने तो पाकिस्तान की भूमिका पर ही सवाल उठाए हैं.

दरअसल, पिछले हफ्ते आसिम मुनीर ने ईरान का दौरा किया था. 48 घंटे तक मुनीर ने ईरान के नेताओं के साथ मीटिंग की थी. इसके बावजूद ईरान ने अपना डेलिगेशन नहीं भेजा. दूसरी तरफ मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की थी. मुनीर ने ट्रंप से होर्मुज के बाहर की नाकाबंदी को खत्म करने की अपील की थी. ट्रंप ने भी इसे नहीं माना.

2. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सीजफायर में कूदने की वजह से पाकिस्तान को पैसे का भी नुकसान हुआ है. सीजफायर के दौरान पाकिस्तान ने यूएई को किनारे कर दिया, जिसके बाद यूएई ने अपना पैसा वापस मांग लिया. रिपोर्ट के मुताबिक इसके कारण पाकिस्तान का फॉरेक्स रिजर्व यानी डॉलर की संख्या में कमी आई है.

पाकिस्तान ने अपने फॉरेक्स रिजर्व से ही यूएई का कर्ज चुकाया है. इसके कारण अब उसके रिजर्व में सिर्फ 20 बिलियन डॉलर बचा है. रिजर्व में डॉलर की कमी के कारण अब पाकिस्तान पर आईएमएफ का दबाव बढ़ेगा.

3. ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने के फेर में पाकिस्तान ने यूएई जैसे देशों को खो दिया है. दरअसल, यूएई चाहता था कि समझौते के बारे में पाकिस्तान उसे भी विश्वास में ले, लेकिन पाकिस्तान ने यूएई के पक्ष को दरकिनार कर दिया. इसके कारण यूएई पाकिस्तान से काफी नाराज है.

यूएई और पाकिस्तान के बीच औसतन 10 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है. पाकिस्तान के हजारों लोग यूएई में रहते हैं. अब इन लोगों को वापस पाकिस्तान में लौटने का दबाव बन सकता है.

khabarmonkey@gmail.com

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