Deenanath Mangeshkar Death Anniversary Special Story: भारतीय संगीत जगत में दीनानाथ मंगेशकर का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। दीनानाथ मंगेशकर का जन्म 29 दिसंबर 1900 को गोवा के मंगेशी गांव में हुआ था। धार्मिक माहौल में पले-बढ़े दीनानाथ को संगीत की शुरुआती शिक्षा अपनी मां से मिली। महज पांच साल की उम्र में ही उन्होंने औपचारिक रूप से संगीत सीखना शुरू कर दिया था।

कम उम्र में ही दीनानाथ मंगेशकर का झुकाव मराठी रंगमंच की ओर हो गया। दीनानाथ मंगेशकर ने किर्लोस्कर नाटक मंडली से जुड़कर अभिनय और गायन की शुरुआत की। उस दौर में महिला कलाकारों की कमी के कारण पुरुष ही स्त्री भूमिकाएं निभाते थे, और दीनानाथ मंगेशकर ने भी कई नाटकों में महिला पात्रों को जीवंत किया। दीनानाथ मंगेशकर की मंच पर मौजूदगी बेहद प्रभावशाली थी।
दीनानाथ मंगेशकर का दमदार अभिनय
दीनानाथ मंगेशकर की आवाज और अभिनय दोनों ही दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उन्होंने मराठी के साथ-साथ हिंदी और उर्दू नाटकों में भी काम किया और हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी। साल 1918 में दीनानाथ मंगेशकर ने अपनी खुद की ‘बलवंत संगीत नाटक मंडली’ की स्थापना की। इस मंच के जरिए दीनानाथ मंगेशकर ने सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित कई सफल नाटक प्रस्तुत किए। इससे दीनानाथ मंगेशकर की पहचान एक कुशल कलाकार और निर्माता के रूप में और मजबूत हुई।
सिनेमा में भी आजमाया हाथ
1930 के दशक में दीनानाथ मंगेशकर ने फिल्मों की दुनिया में भी कदम रखा। उनकी फिल्म कृष्णार्जुन युद्ध खास तौर पर चर्चा में रही। इस फिल्म में दीनानाथ मंगेशकर ने अभिनय के साथ-साथ गायन भी किया, जिससे उनकी बहुमुखी प्रतिभा सामने आई। दीनानाथ मंगेशकर का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने परिवार और कला दोनों को संतुलित रखा।
छोटी उम्र में बड़ा योगदान
दीनानाथ मंगेशकर की संतानों में लता मंगेशकर, और जैसे महान कलाकार शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 24 अप्रैल 1942 को मात्र 41 वर्ष की उम्र में दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। हालांकि दीनानाथ मंगेशकर का जीवन छोटा रहा, लेकिन उनका योगदान भारतीय संगीत और रंगमंच के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।





