Thursday, April 23, 2026
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चीन के दम पर पूरा होगा पाकिस्तान का ख्वाब, पहली बार स्पेस स्टेशन जाएंगे एस्ट्रोनॉट

चीन ने अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान के दो एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट किया है. इन दोनों के नाम मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम दाऊद हैं. इनमें से एक अंतरिक्ष यात्री इस साल चीनी टीम के साथ पेलोड स्पेशलिस्ट के रूप में जाएगा और चीन के स्पेस स्टेशन तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहुंचने वाला पहला विदेशी अंतरिक्ष यात्री बनेगा.

चीन के दम पर पूरा होगा पाकिस्तान का ख्वाब, पहली बार स्पेस स्टेशन जाएंगे एस्ट्रोनॉट
चीन के दम पर पूरा होगा पाकिस्तान का ख्वाब, पहली बार स्पेस स्टेशन जाएंगे एस्ट्रोनॉट

चीन की स्पेस एजेंसी के मुताबिक, दोनों अंतरिक्ष यात्री ट्रेनिंग के लिए बीजिंग जाएंगे. इनका सिलेक्शन फरवरी 2025 में चीन और पाकिस्तान के बीच हुए एक समझौते के बाद किया गया है. समझौते के तहत पाकिस्तान के अंतरिक्ष यात्रियों को चीन के स्पेस मिशनों में हिस्सा लेने की अनुमति मिली है. चीन ने इसे अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है.

पाकिस्तानी सैटेलाइट्स भी लॉन्च कर चुका है चीन

इससे पहले चीन पाकिस्तान के लिए कई सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है, जिनमें रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट शामिल हैं. इसके अलावा, चीन 2028 में होने वाले चांगई-8 मिशन के तहत चांद पर एक पाकिस्तानी रोवर भेजने की तैयारी कर रहा है. चीन ने यह भी कहा है कि वह अपने स्पेस स्टेशन पर दूसरे देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को रिसर्च और प्रयोग करने का मौका देगा.

पाकिस्तान ने इस कदम को बड़ी उपलब्धि बताया है. दोनों अंतरिक्ष यात्री जल्द ही चीन जाकर एडवांस ट्रेनिंग शुरू करेंगे. यह घटनाक्रम महज एक कूटनीतिक कदम नहीं है. यह पहली बार है जब चीन अपने स्पेस स्टेशन तियांगोंग पर विदेशी नागरिकों को ट्रेन करेगा. चीन का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अच्छा उदाहरण है.

4 साल पहले तैयार हुआ था चीनी स्पेस स्टेशन

चीन का अपना स्पेस स्टेशन 2022 में तैयार हुआ था. अमेरिका ने 2011 में चीन को NASA के साथ काम करने से रोक दिया था. इसके बाद चीन ने अपना अलग स्पेस स्टेशन बनाया. फिलहाल दुनिया में दो बड़े स्पेस स्टेशन काम कर रहे हैं. एक चीन का तियांगोंग और दूसरा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन, जिसे 2030 तक बंद करने की योजना है.

पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों को अपने स्टेशन में शामिल करना इस बात का संकेत है कि चीन अपने स्पेस स्टेशन को दुनिया के लिए एक विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है. चीन यह दिखाना चाहता है कि उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम खुला है और वह विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है.

khabarmonkey@gmail.com

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