Thursday, April 23, 2026
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दिन में दो बार गायब होता है ये द्वीप, 1300 साल से जारी ये सिलसिला; आखिर क्या है वजह?

अगर आप जिस रास्ते से हर दिन सफर करते हों, उसके बारे में कहा जाए कि वो दिन में दो बार गायब हो सकता है यानी उसके गायब होने में महज कुछ चंद घंटे लगते हैं तो ऐसी कल्पना थोड़ी करना मुश्किल है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा द्वीप है, जो दिन में दो बार गायब हो सकता है. ये जगह फ्रांस में स्थित है. फ्रांस के नॉरमैंडी के तट से दूर मोंट-सेंट-मिशेल नाम की जगह है, जहां मोंट-सेंट-मिशेल के पास जाने के लिए दिखाई देने वाला आम रास्ता हर दिन जाने के लिए मौजूद नहीं होता है. इसके पीछे की वजह है यहां आने वाला ज्वार, जिसकी वजह से द्वीप तक जाने वाला रास्ता नजर नहीं आता है. ऐसे में द्वीप कट जाता है और वो लोगों को नजर नहीं आता है.

दिन में दो बार गायब होता है ये द्वीप, 1300 साल से जारी ये सिलसिला; आखिर क्या है वजह?
दिन में दो बार गायब होता है ये द्वीप, 1300 साल से जारी ये सिलसिला; आखिर क्या है वजह?

सबसे ज्यादा ऊंचे ज्वार आते हैं

यह द्वीप एक ऐसी खाड़ी में स्थित है जो यूरोप के सबसे ऊंचे ज्वारों के लिए जानी जाती है. कम और ज्यादा ज्वार के बीच पानी का स्तर 14 से 15 मीटर तक बढ़ सकता है. कम ज्वार के समय, समुद्र कई किलोमीटर पीछे हट जाता है, जिससे एक चौड़ा रेतीला इलाका दिखाई देने लगता है. ऐसी स्थिति में द्वीप तक पहुंचने के लिए पुल पार करके पैदल चलना या गाड़ी चलाना आसान हो जाता है.

फिर ज्वार के समय इस रुख एकदम उलट जाता है. जैसे ही पानी वापस आना शुरू होता है, वह धीरे-धीरे उसी रास्ते को कवर कर लेता है. इसका इस्तेमाल लोग इस समय नहीं कर सकते क्योंकि अब द्वीप फिर से पूरी तरह से पानी से घिर जाता है. ऐसा बदलाव होने में करीब 12 घंटे और 25 मिनट का समय लगता है. इसके पीछे की वजह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण होती है.

धार्मिक लिहाज से भी काफी अहम

ऐसे में यहां होने वाले इस बदलाव को कोई नई या असामान्य बात नहीं माना जाता है. यह सिलसिला यहां 1,300 से भी ज्यादा सालों से चला आ रहा है. मोंट-सेंट-मिशेल की कहानी 708 ईस्वी से शुरू होती है, जब इस पथरीले द्वीप पर पहली बार एक छोटा सा धार्मिक ढांचा बनाया गया था. समय के साथ यह एक विशाल ईसाई मठ (एबे) में बदल गया. फिर मध्ययुगीन काल के समय ये एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बन गया. यहां पर लोग प्रार्थना करने के लिए आते हैं.

ज्वार क्या है?

ज्वार बहुत लंबे समय तक चलने वाली लहरें होती हैं, जो चांद और सूरज के लगाए हुए बलों के कारण समुद्र में चलती हैं. ज्वार समुद्र में ही पैदा होते हैं और तटों की ओर बढ़ते हैं. यहां वे समुद्र की सतह के नियमित रूप से ऊपर-नीचे होने के रूप में दिखाई देते हैं. जब लहर का सबसे ऊंचा हिस्सा या शिखर, किसी खास जगह पर पहुंचता है, तो ‘उच्च ज्वार’ आता है. वहीं लहर का सबसे निचला हिस्सा, या गर्त, ‘निम्न ज्वार’ को दर्शाता है.

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