Thursday, April 23, 2026
Viral

‘जंग किसी भी वक्त’, बम बरसाने वाले ट्रंप IRGC के जंगी तेवर से बेचैन, बातचीत के लिए बेताब

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. बातचीत पर तो फिलहाल ब्रेक है लेकिन जंग के दूसरे राउंड की तैयारी जोरों से चल रही है. ईरान ने बातचीत के लिए अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने ये साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक बातचीत का कोई सवाल ही नहीं है.

‘जंग किसी भी वक्त’, बम बरसाने वाले ट्रंप IRGC के जंगी तेवर से बेचैन, बातचीत के लिए बेताब
‘जंग किसी भी वक्त’, बम बरसाने वाले ट्रंप IRGC के जंगी तेवर से बेचैन, बातचीत के लिए बेताब

IRGC के इन तेवरों ने डील के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेताबी को और बढ़ा दिया है. इसलिए आज इस कूटनीतिक पिक्चर को ‘बेताब’ कहा जा सकता है. जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई मुख्य भूमिका में हैं. ट्रंप डील को लेकर इतने बेचैन हैं कि उन्होंने सीजफायर की मियाद को एकतरफा आगे बढ़ा दिया.

उन्होंने कहा कि ईरान को पांच दिन का वक्त दे रहे हैं. ईरान ने जैसे ही पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को वार्ता में शामिल ना होने की सूचना भेजी. ट्रंप ने सीजफायर आगे बढ़ा दिया. आशंका तो ये थी कि ईरान के वार्ता से इनकार करते ही ट्रंप हमले का आदेश दे देंगे. लेकिन ट्रंप ने पांच दिन की मोहलत दी है. ये उनके बदले-बदले तेवर हैं. जिसमें वो बमबारी पर नहीं बातचीत पर जोर दे रहे हैं. दूसरी तरफ ईरान आक्रामक है.

ईरान महायुद्ध के राउंड-2 के लिए तैयार

ट्रंप जहां नाकाबंदी से ईरान का आर्थिक नुकसान गिनवा रहे हैं. वहीं IRGC विध्वंसक हमले की धमकी जारी कर रही है. IRGC ने बयान जारी कर कहा कि इस बार अमेरिका को ऐसा सबक सिखाएंगे जिसे वो कभी नहीं भूल पाएगा. इस बयानबाजी से साफ है कि कूटनीतिक पिक्चर में ट्रंप डील के लिए बेचैन हैं और IRGC युद्ध के लिए बेताब है. अब ईरान में ट्रंप की इसी बेचैनी का मजाक उड़ाया जा रहा है.

ईरान के सरकारी मीडिया ने 44 सेकेंड का एक AI वीडियो जारी किया, जिसमें ट्रंप के एकतरफा युद्धविराम बढ़ाने वाले फैसले का मजाक उड़ाया गया है. ट्रंप को अपने प्रतिनिधियों के साथ मध्यस्थता वाले एक कमरे में ईरानी प्रतिनिधियों का बेसब्री से इंतजार करते दिखाया गया है.

बातचीत के लिए नहीं आया करेंगे बमबारी

इससे पहले ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी, कहा था कि सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. ईरान बातचीत के लिए नहीं माना तो बमबारी होगी. लेकिन जब ईरान ने इन धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया तो ट्रंप ने शांति से यू टर्न ले लिया. इसके पीछे कई वजह हैं, पहली वजह है, युद्ध वाली पॉलिसी का फेल होना. 40 दिन की बमबारी के बाद भी अमेरिका अपना मकसद पूरा नहीं कर पाया.

दूसरी वजह है, अमेरिकी नाकांबदी का असर ना होना. ट्रंप ने सोचा था कि नाकाबंदी से ईरान झुक जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं. जब ट्रंप का कोई रणनीतिक दबाव काम नहीं कर रहा. तो उनके पास एक ही विकल्प है कि वो ईरान से कोई डील कर लें और उसे खुद की जीत दिखा दें.

सीजफायर का उल्लंघन है नाकाबंदी

एयर डिफेंस हथियारों की कमी और घटती अप्रवूल रेटिंग ने ट्रंप का टेंशन बढ़ा दिया है. दावा है कि वो डील के जरिए ईरान युद्ध से बाहर निकलना चाहते हैं. लेकिन IRGC की सख्त शर्तों ने उनका ये सपना भी फिलहाल तोड़ दिया है. IRGC की पहली शर्त है कि अमेरिकी नाकाबंदी खत्म की जाए. ईरान इस नाकाबंदी को सीजफायर का उल्लंघन मान रहा है.

इसके अलावा ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की बार-बार हमले की धमकी से भी भड़का हुआ है. ईरान का ये भी कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी नियंत्रण स्वीकार कर लिया जाए. ईरान चाहता है कि बातचीत से पहले उसका वो जहाज लौटा दिया जाए, जिसे अमेरिका ने कब्जा लिया है.

ईरानी सत्ता का सबसे शक्तिशाली केंद्र IRGC

ईरान के साथ ट्रंप की ड्रीम डील के बीच IRGC दीवार बनकर खड़ी है. दावा है कि IRGC ईरानी सत्ता का सबसे शक्तिशाली केंद्र बन गई है. बातचीत से संबंधित फैसलों पर भी उसी का प्रभाव है. युद्ध के दौरान इजराइल और अमेरिका की जो रिपोेर्ट थी, आखिर वो सच साबित हो रही है.

ईरान का वर्तमान शासन पहले से ज्यादा कट्टर

दरअसल लंबे युद्ध के बाद भी ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हो पाया. अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान का वर्तमान शासन पहले से ज्यादा कट्टर और सख्त है. अब IRGC में अमेरिका को लेकर पहले से ज्यादा नफरत है. इसलिए IRGC को बातचीत से ज्यादा भरोसा अपनी ताकत दिखाने में है. यही वजह है कि ईरान का शासन अमेरिका को सीधी चुनौती दे रहा है. चुनौती भी इस लहजे में दी जा रही है, जिससे सुपरपावर वाली ग्लोबल साख को नुकसान पहुंचे. ईरान की सत्ता पर अब IRGC का फुल कंट्रोल है. सुप्रीम लीडर खामेनेई तक लोगों की पहुंच सीमित कर दी गई है. इसलिए अब बातचीत से ज्यादा बारूद की बात हो रही है.

ईरान अब सऊदी अरब, कुवैत, क़तर और बहरीन जैसे अरब देशों के सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमले नहीं करेगा. अगर इन देशों ने अमेरिका को मदद बंद नहीं की. लेकिन अमेरिका को एयरस्पेस दिया तो ईरान विध्वंसक हमले करेगा और ऑयल फेसिलिटीज को बर्बाद कर देगा.

होर्मुज स्ट्रेट का इलाका खाली करने की चेतावनी

ईरान ने चेतावनी दी है कि खाड़ी देशों में रह रहे विदेशी नागरिक जल्द वहां से निकल जाएं. UAE, सऊदी, कतर, बहरीन, कुवैत को जल्द छोड़ दें. फारस की खाड़ी में मौजूद जहाजों के नाविक भी चले जाएं और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास का इलाका खाली कर दें. ईरान ने धमकी दी है कि होर्मुज के पास मौजूद जहाज पहले टारगेट होंगे. क्योंकि अब बातचीत का समय खत्म हो रहा है.

ट्रंप के ग्रीन सिग्नल का इंतजार

वहीं इजराइल भी युद्ध वाली तैयारी में जुटा है. इजराइल को बस ट्रंप के ग्रीन सिग्नल का इंतजार है. नेतन्याहू ने राउंड-2 का वॉर प्लान एक्टिव कर दिया है. इस बार अगर युद्ध हुआ तो इजराइल पूरी ताकत के साथ ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को टारगेट करेगा. इसके अलावा मिसाइल लॉन्च साइट्स और न्यूक्लियर ठिकाने टारगेट पर होंगे. IRGC के कमांड सेंटर्स के अलावा मुज्तबा और दूसरे IRGC कमांडर्स को भी टारगेट किया जा सकता है.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply