लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान 2029 से लागू करने वाले संविधान संशोधन बिल के लोकसभा में पास न हो पाने के बाद राजनीति तेज हो गई है. जहां एक ओर सरकार विपक्ष को महिला विरोधी बोलकर घेर रही है तो वही विपक्ष डेलिमिटेशन को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है. इस पूरी चर्चा के बीच विपक्ष की ओर से एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया कि सरकार मौखिक रूप से कह रही है कि सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, लेकिन बिल में कहीं भी इसका उल्लेख नहीं किया गया था. इस मामले पर सरकार के सूत्रों की तरफ से जानकारी दी गई कि इसका उल्लेख करना तकनीकी रूप से ठीक नहीं.

इस संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का स्पष्ट उल्लेख नहीं किए जाने को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. इस पर सरकार के शीर्ष सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि विधेयक की भाषा और संवैधानिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ऐसा उल्लेख करना तकनीकी रूप से उचित नहीं था.
सूत्रों के अनुसार, किसी भी विधेयक में केवल स्पष्ट, ठोस और निश्चित प्रावधानों का ही उल्लेख किया जाता है. लगभग जैसे सामान्य अभिव्यक्तियों को विधायी भाषा में शामिल करना उपयुक्त नहीं माना जाता क्योंकि इससे व्याख्या में अस्पष्टता और कानूनी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. सूत्रों ने यह भी बताया कि 50 प्रतिशत वृद्धि का सीधा उल्लेख व्यावहारिक स्तर पर भी समस्याएं पैदा करता. देश के कई राज्यों में लोकसभा या विधानसभा सीटों की संख्या विषम है. ऐसे में 50 प्रतिशत वृद्धि लागू करने पर सीटों की संख्या पूर्ण नहीं बनती, जबकि किसी भी सदन में आधी सीट का अस्तित्व संभव नहीं है.
उदाहरण के तौर पर, जिन राज्यों में सीटों की संख्या विषम है, वहां 50 प्रतिशत वृद्धि करने पर अंतिम संख्या पूर्णांक में नहीं आती. इसी प्रकार, कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में केवल एक ही सीट है. ऐसे मामलों में 50 फीसदी बढ़ोतरी का मतलब 0.5 सीट होता, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है. ऐसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कम से कम एक सीट बढ़ानी अनिवार्य होती, जिससे वृद्धि 100 प्रतिशत हो जाती.
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इन तकनीकी और व्यावहारिक बाधाओं के चलते विधेयक में 50 प्रतिशत सीट वृद्धि का सीधा उल्लेख नहीं किया जा सकता था. सूत्रों ने ये भी बताया कि इस पूरे मामले पर जब सरकार की तरफ से अलग अलग दलों से बात की गई थी तो इस तकनीकी मामलों की जानकारी विपक्षी दलों को दी गई थी. इसके बावजूद भी विपक्षी दलों ने सिर्फ अड़ंगा डालकर बिल को रोकने का काम किया.





