ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध ने अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के स्टॉक पर इतना दबाव बना दिया है कि यूक्रेन को मिलने वाली मदद प्रभावित हो रही है. पेंटागन अब Patriot PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइलों की कुछ खेप यूक्रेन के लिए रोक या डायवर्ट करने पर विचार कर रहा है. यह इस युद्ध का अनोखा ट्विस्ट है. मिडिल ईस्ट का युद्ध यूरोप में रूस-यूक्रेन मोर्चे को कमजोर कर रहा है.

कैसे शुरू हुई यह कमी?
फरवरी-मार्च 2026 में जब और इजराइल ने ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमले शुरू किए, तो ईरान ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे.
– गल्फ देशों (सऊदी, कतर, UAE) और इजराइल की रक्षा के लिए Patriot और THAAD सिस्टमों का भारी इस्तेमाल हुआ.
– पहले हफ्ते में ही मिडिल ईस्ट के सहयोगी देशों ने 800 Patriot इंटरसेप्टर फायर कर दिए. जबकि यूक्रेन ने पूरे चार साल के युद्ध में सिर्फ 600 इस्तेमाल किए थे.
– अमेरिका ने खुद THAAD के करीब 150 इंटरसेप्टर (कुल स्टॉक का लगभग 25-30%) खर्च कर दिए.
– ईरान युद्ध ने Patriot स्टॉक को इतना घटा दिया कि पेंटागन के पास अब केवल 25% जरूरी इंटरसेप्टर बचे हैं, जितने पेंटागन की सभी योजनाओं के लिए चाहिए.
– सूत्रों के मुताबिक Lockheed Martin साल में 500-650 PAC-3 MSE इंटरसेप्टर बना पा रहा है। जिसमें से साल 2025 में 620 इंटरसेप्टर डिलीवर किए.
– THAAD की उत्पादन दर सिर्फ 96 प्रति वर्ष है. ईरान युद्ध ने इन उत्पादन लाइनों पर भारी दबाव डाला.अब पेंटागन ने उत्पादन को 2000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसमें 7 साल लगेंगे.
यूक्रेन पर असर… मदद रुकी, रूसी हमले बढ़े
पेंटागन ने NATO के PURL प्रोग्राम (जिसमें यूरोपीय देश पैसे देकर अमेरिका से हथियार खरीदकर यूक्रेन को देते हैं) के तहत जाने वाली Patriot इंटरसेप्टर की कुछ खेप रोक दी है. मार्च 2026 में ही कुछ एयर डिफेंस मिसाइलों की डिलीवरी डिले या डायवर्ट करने का फैसला लिया गया.
इसका नतीजा ये हुआ कि रूस ने Zaporizhzhia, खार्किव और ओडेसा पर ड्रोन-मिसाइल हमले तेज कर दिए. यूक्रेन के एयर डिफेंस गैप बढ़ गए. जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि अगर ईरान युद्ध लंबा चला तो यूक्रेन की हवा की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, हम एक जगह से लेकर दूसरी जगह इस्तेमाल करते हैं. लेकिन यूक्रेनी अधिकारी इसे प्राथमिकता का त्याग मान रहे हैं.
ट्रंप ने कहा कि युद्ध बहुत अच्छी तरह चल रहा है लेकिन स्टॉक की कमी को पिछली सरकार और यूक्रेन की मदद का दोष दिया.
ईरान युद्ध ने Patriot और THAAD स्टॉक को गंभीर रूप से घटा दिया. ऐसे में CSIS के मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट डायरेक्टर टॉम काराको ने कहा, हम इस संघर्ष में पहले से ही एक बड़ी खाई के साथ शुरू हुए थे. पिछले महीने में हमने इन मिसाइलों को लगातार फायर करते हुए उस खाई को और गहरा कर दिया है.
स्टॉक की कमी का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट है, यूक्रेन नहीं. अमेरिका की इस घटती एयरडिफेंस की ताकत का फायदा रूस को युद्ध में मिल रहा है. रूस अब उन शहरों पर फोकस कर रहा है जहां Patriot कम हैं.
लेकिन अब यह सिर्फ यूक्रेन की समस्या नहीं-
1. ग्लोबल शॉर्टेज: ताइवान, गल्फ देश और NATO भी इसी स्टॉक पर नजर रखे हुए हैं.
2. आर्थिक आयरनी: एक PAC-3 इंटरसेप्टर की कीमत 13 मिलियन डॉलर है. ईरान में उड़ाए गए सैकड़ों मिसाइलों की कीमत अरबों में है, जबकि उत्पादन लाइनें पहले से ही दबाव में हैं.
3. भविष्य का खतरा: अगर ईरान सीजफायर टूटा तो यूक्रेन को Patriot मिलना और मुश्किल हो जाएगा.
बड़ा सवाल- इसका क्या समाधान है?
Lockheed Martin ने THAAD उत्पादन को 96 से 400 और Patriot को 600 से 2000 प्रति वर्ष बढ़ाने का समझौता किया है, लेकिन इसमें सालों लगेंगे. हालांकि यूक्रेन अब खुद ड्रोन और इंटरसेप्टर सह-उत्पादन का प्रस्ताव दे रहा है ताकि अमेरिकी स्टॉक बचाए जा सकें.
एक युद्ध दूसरे युद्ध को कमज़ोर कर रहा है. ईरान में उड़ाए गए महंगे इंटरसेप्टर अब यूक्रेन के आसमान को खाली छोड़ रहे हैं. रूस इस स्थिति से फायदा उठा रहा है. सवाल यह है कि क्या अमेरिका अब दो मोर्चों की जंग लड़ने की क्षमता खो चुका है? या यह नई वैश्विक रणनीति की शुरुआत है, जहां एक युद्ध का बोझ दूसरे पर पड़ता है.





