अमेरिका ने कुछ यूरोपीय देशों को दिए जाने वाले हथियारों की सप्लाई में देरी करने का फैसला किया है. इसकी वजह ईरान के साथ चल रहा युद्ध है. युद्ध की वजह से अमेरिका का हथियार और गोला-बारूद भंडार तेजी से कम हो रहा है. अमेरिकी अधिकारियों ने हाल ही में अपने यूरोपीय सहयोगियों को बताया कि पहले से तय कुछ हथियारों की डिलीवरी अब समय पर नहीं हो पाएगी.

रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले से जुड़े पांच सूत्रों ने यह जानकारी दी है. अमेरिका के इस फैसले का असर बाल्टिक क्षेत्र और स्कैंडिनेविया के कई देशों पर पड़ेगा. इनमें से कई हथियार फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रोग्राम (FMS) के तहत खरीदे गए थे. इस योजना में दूसरे देश अमेरिका से हथियार खरीदते हैं, उनकी सप्लाई और बाकी मदद अमेरिका करता है. लेकिन अब ये हथियार अभी तक भेजे नहीं गए हैं और उनमें देरी होने वाली है.
सुरक्षा कारणों से देशों के नाम नहीं बताए
सूत्रों के मुताबिक, जिन देशों पर इस देरी का असर पड़ा है, उनके नाम सुरक्षा कारणों से नहीं बताए गए हैं. इनमें से कुछ रूस की सीमा के पास हैं. देरी होने वाले हथियारों में अलग-अलग तरह का गोला-बारूद शामिल है, जो हमले और डिफेंस दोनों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
इस मामले पर व्हाइट हाउस और विदेश विभाग से सवाल पूछा गया, उन्होंने कहा कि पेंटागन जानकारी देगा. हालांकि पेंटागन ने भी कोई जवाब नहीं दिया है. हथियारों की सप्लाई में यह देरी दिखाती है कि ईरान युद्ध की वजह से अमेरिकी संसाधनों पर कितना दबाव पड़ा है. यूरोपीय देशों के अधिकारियों का कहना है कि इससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है और वे मुश्किल स्थिति में आ सकते हैं.
यूरोपीय देशों में बढ़ी नाराजगी
के नेतृत्व में अमेरिका पहले ही यूरोपीय देशों पर ज्यादा अमेरिकी हथियार खरीदने का दबाव डालता रहा है. इसका मकसद यह था कि यूरोप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाए. लेकिन अब बार-बार हो रही देरी से यूरोपीय देशों में नाराजगी बढ़ रही है. कुछ देश अब यूरोप में बने हथियार खरीदने की भी सोच रहे हैं.
US अधिकारियों ने सप्लाई रोकने की वजह बताई
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ये हथियार मिडिल ईस्ट युद्ध के लिए जरूरी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय देशों ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में अमेरिका और इजराइल की ज्यादा मदद नहीं की. ईरान युद्ध से पहले ही अमेरिका अपने हथियारों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर चुका था. 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले और 2023 में गाजा में इजराइल के अभियान के दौरान अमेरिका ने बड़ी मात्रा में हथियार सप्लाई की थी.
ईरान ने युद्ध के दौरान खाड़ी देशों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. इनमें से ज्यादातर हमलों को रोक दिया गया, जिसमें PAC-3 पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर्स का इस्तेमाल हुआ. यही सिस्टम यूक्रेन भी अपनी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करता है.





