Wednesday, April 15, 2026
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परिसीमन के खिलाफ स्टालिन का बड़ा ऐलान! कहा- केंद्र को 'भारी कीमत' चुकानी होगी

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के खिलाफ 16 अप्रैल को पूरे राज्य में काले झंडे दिखाकर प्रदर्शन की घोषणा की और केंद्र को चेतावनी दी कि यदि उसने तमिलनाडु की आवाज पर ध्यान नहीं दिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और ”भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने परिसीमन के विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पार्टी सांसदों और पार्टी जिला सचिवों की एक आपात बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, ”हमारे सिर पर लटकी तलवार अब हम पर आ गिरी है।” उन्होंने कहा कि द्रमुक सभी राज्यों के सांसदों से संपर्क साध रही है और इस ”गंभीर खतरे” का मुकाबला करने के लिए समन्वित रणनीति तैयार कर रही है।

परिसीमन के खिलाफ स्टालिन का बड़ा ऐलान! कहा- केंद्र को 'भारी कीमत' चुकानी होगी
परिसीमन के खिलाफ स्टालिन का बड़ा ऐलान! कहा- केंद्र को 'भारी कीमत' चुकानी होगी

एक बयान में स्टालिन ने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को संसद में लाया जाने वाला परिसीमन संशोधन तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों के खिलाफ एक ”घोर ऐतिहासिक अन्याय” है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया दक्षिणी राज्यों के खिलाफ है। उन्होंने पूछा कि क्या परिसीमन प्रक्रिया ”भारत की प्रगति में योगदान देने की सजा है? उन्होंने यह पूछा, ”क्या तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों को इस तरह से इनाम दिया जा रहा है?”

उन्होंने दावा किया कि स्वाभाविक रूप से विंध्य के दक्षिण क्षेत्र का हर दक्षिण भारतीय गुस्से से उबल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, ”भाजपा आग से खेल रही है। परिसीमन के खिलाफ कल (16 अप्रैल को) समूचे तमिलनाडु में घरों, सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे लगाए जाएंगे।” उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ने तमिलनाडु की आवाज का सम्मान करने और पीछे हटने से इनकार किया तो आपको इसके परिणाम भुगतने होंगे।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा, ”आपको भारी कीमत चुकानी होगी।” उन्होंने कहा कि यह चेतावनी सिर्फ द्रमुक के अध्यक्ष रूप में नहीं दी गई है बल्कि सबसे बढ़कर एक ”स्वाभिमानी तमिल” के रूप में दी गई है। द्रमुक प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी सभी राज्यों से संपर्क कर रही हैं। उन्होंने कहा, ”यह पार्टियों या व्यक्तियों के बारे में नहीं है। यह हमारे लोगों के अधिकारों की रक्षा के बारे में है। मैं देश भर की सभी पार्टियों, सांसदों से हमारे लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील करता हूं।”

इससे पहले स्टालिन ने दिन में द्रमुक सांसदों के साथ आपात बैठक की और बाद में पार्टी जिला सचिवों की बैठक बुलाई, जिसमें केंद्र द्वारा प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के कारण राज्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव के संबंध में चर्चा की गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्टालिन ने अपने व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बीच धर्मपुरी से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह आपात बैठक की।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने मंगलवार को चेतावनी दी थी कि अगर परिसीमन प्रक्रिया में राज्य के हित को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम उठाया गया या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत में अनुचित वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे, ”पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन” होंगे जिससे राज्य ठप पड़ सकता है। स्टालिन ने कहा कि देश को एक बार फिर ”1950 और 1960 के दशक की द्रमुक देखने को मिल सकती है।” उन्होंने स्पष्ट तौर पर पार्टी के शुरुआती दौर की ओर इशारा किया जिसमें पार्टी ने राज्य के अधिकारों और हिंदी को कथित रूप से थोपे जाने के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया था।

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