अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज से नाकाबंदी खत्म करने की घोषणा की है. ट्रंप ने एक बयान में कहा कि हम अब पूरी तरह से इसे खोल रहे हैं. चीन से हमारी इसको लेकर बात हुई है. चीन ईरान को हथियार नहीं देगा, जिसके बाद हमने इसे हमेशा के लिए खोलने का फैसला किया है. ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब यह खबर आई थी कि पूरी तरह से फेल हो गई है.

एक सोशल पोस्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि अब कभी भी होर्मुज के बंद होने की नौबत नहीं आएगी. यह सभी देशों के लिए खुल गया है. मैं इससे बहुत खुश हूं.
चीन ने हथियार नहीं देने का वादा किया
सीजफायर के बीच पिछले दिनों यह खबर आई थी कि चीन ने ईरान को कुछ हथियार भेजे हैं. ट्रंप का कहना है कि इसके बाद मैंने चीन के राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा, जिसमें मैंने उनसे हथियार नहीं देने के लिए कहा था. चीन के राष्ट्रपति मान गए हैं.
ट्रंप ने आगे कहा कि मैं जब चीन जाऊंगा तो जिनपिंग मुझे गले लगाएंगे. जिनपिंग के साथ मेरे संबंध अच्छे हैं. इससे पहले सोमवार (13 अप्रैल) को सेंटकॉम ने ट्रंप के निर्देश पर होर्मुज को पूरी तरह ब्लॉक करने की घोषणा की थी.
ट्रंप ने इसे खोलने का ऐलान क्यों किया?
1. वॉल स्ट्रीट जनरल के मुताबिक होर्मुज के बाहर अमेरिका की नाकाबंदी फेल साबित हुआ है. नाकाबंदी के पहले दिन करीब 20 जहाज होर्मुज से होकर गुजरे. इन जहाजों को अमेरिकी सेना रोक नहीं पाई. अधिकांश जहाज चीन के थे, जिसे रोकना अमेरिका के लिए भारी पड़ सकता था. क्योंकि, चीन ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी थी.
2. ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश होर्मुज को लेकर एक्टिव था. फ्रांस का कहना था कि जो भी देश जंग में शामिल है, उसे होर्मुज से दूर किया जाएगा. जंग लड़ने वाले देश पूरी दुनिया को परेशान नहीं कर सकता है. ब्रिटेन और फ्रांस इसके लिए व्यापक गठबंधन तैयार कर रहा था.
3. अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में इस हफ्ते के आखिर में पीस डील को लेकर मीटिंग प्रस्तावित है. इस मीटिंग से पहले अगर होर्मुज में अमेरिका का भद पिटता तो नेगोसिएशन टेबल पर ट्रंप की टीम कमजोर पड़ सकती थी. बातचीत से पहले ही ट्रंप ने इससे खुद को अलग कर लिया है.





