बेलग्रेड। यूरोप के देश सर्बिया की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। छात्र आंदोलन से निकली ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने संसदीय चुनाव में शानदार जीत का दावा मजबूत किया है, जबकि लंबे समय से देश की राजनीति पर दबदबा बनाए रखने वाले अलेक्जेंडर वुसिक ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। 25 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव के शुरुआती अनुमानों के बाद वुसिक ने माना कि उनकी राजनीतिक सूची चुनाव हार गई है। इस घटनाक्रम को सर्बिया की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

छात्रों के आंदोलन ने कैसे पलटी बाजी?
सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन की छतरी ढहने की दर्दनाक घटना के बाद हुई थी। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रों ने जवाबदेही तय करने, कथित भ्रष्टाचार की जांच और सरकारी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।
धीरेधीरे यह विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय परिसरों से निकलकर देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। छात्रों के साथ शिक्षक, डॉक्टर, पेशेवर और आम नागरिक भी जुड़ने लगे। आंदोलनकारियों ने सरकार से जवाबदेही और संस्थाओं को मजबूत बनाने की मांग की। करीब दो साल तक चले इस आंदोलन ने वुसिक की राजनीतिक ताकत के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।
चुनाव में कितनी बड़ी जीत का अनुमान?
प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, 250 सदस्यीय सर्बियाई संसद में छात्र समर्थित ‘स्टूडेंट लिस्ट’ को लगभग 135 से 140 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। वहीं, वुसिक के राजनीतिक खेमे को करीब 105 सीटें मिलने की बात कही गई।
वुसिक ने खुद स्वीकार किया कि उनकी सूची चुनाव हार गई है। हालांकि, उस समय अंतिम आधिकारिक नतीजे घोषित नहीं हुए थे। इसलिए शुरुआती अनुमानों और अंतिम चुनाव परिणामों के बीच अंतर संभव था।
2017 में राष्ट्रपति बने थे वुसिक
अलेक्जेंडर वुसिक ने 31 मई 2017 को सर्बिया के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। इससे पहले वह देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके थे। एक दशक से अधिक समय तक सर्बिया की राजनीति में उनका प्रभाव बना रहा।
सितंबर 2026 में उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, ताकि संसदीय चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत के साथ उतर सकें और दोबारा प्रधानमंत्री पद की ओर वापसी की कोशिश कर सकें। लेकिन चुनाव में छात्र आंदोलन की बढ़त ने उनकी रणनीति को बड़ा झटका दिया।
भ्रष्टाचार और सत्ता के खिलाफ जनता का संदेश
छात्र आंदोलन का मुख्य जोर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच, जवाबदेही, स्वतंत्र संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने पर रहा। रेलवे स्टेशन हादसे के बाद उठे सवालों ने सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष को व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल दिया।
इस चुनाव में छात्रों की सफलता ने दिखाया कि लंबे समय तक सत्ता के करीब रहने वाली राजनीतिक ताकतों को भी संगठित जनआंदोलन चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, नई राजनीतिक ताकत के सामने अब वादों को नीतियों में बदलने और सरकार चलाने की कठिन परीक्षा होगी।
सर्बिया की राजनीति में नए दौर की आहट
वुसिक की चुनावी हार स्वीकार करने की घोषणा के बाद बेलग्रेड और अन्य शहरों में छात्र समर्थकों के बीच जश्न की खबरें सामने आईं। यूरोपीय संघ की ओर से भी छात्र सूची की जीत का स्वागत करते हुए कानून के शासन, मीडिया की स्वतंत्रता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सुधारों पर जोर दिया गया।
निष्कर्ष: सर्बिया में छात्र आंदोलन की चुनावी सफलता केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि जवाबदेही और राजनीतिक सुधारों की मांग का बड़ा संकेत है। अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि आंदोलन से निकली यह ताकत जनता की उम्मीदों को कितनी प्रभावी नीतियों में बदल पाती है।