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टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करना चूके तो इतना लगेगा जुर्माना, किन लोगों के लिए है जरूरी?​

इनकम टैक्स ऑडिट कराने वाले कारोबारियों और पेशेवरों के लिए 21 अक्टूबर 2026 अहम तारीख है. असेसमेंट ईयर 202627 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख आज खत्म हो रही है. आयकर विभाग ने पहले इसकी समयसीमा 30 सितंबर तय की थी, जिसे बढ़ाकर 21 अक्टूबर कर दिया गया था. जिन करदाताओं […]

इनकम टैक्स ऑडिट कराने वाले कारोबारियों और पेशेवरों के लिए 21 अक्टूबर 2026 अहम तारीख है. असेसमेंट ईयर 202627 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख आज खत्म हो रही है. आयकर विभाग ने पहले इसकी समयसीमा 30 सितंबर तय की थी, जिसे बढ़ाकर 21 अक्टूबर कर दिया गया था. जिन करदाताओं के लिए टैक्स ऑडिट जरूरी है, उन्हें तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी.

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के बाद इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए भी कुछ समय दिया गया है. ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए ITR जमा करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है.

किन लोगों को कराना होता है टैक्स ऑडिट?

हर कारोबारी या पेशेवर के लिए टैक्स ऑडिट कराना जरूरी नहीं है. यह कारोबार की बिक्री, सालाना कमाई और आयकर कानून में तय दूसरी शर्तों पर निर्भर करता है. कारोबारियों के लिए आमतौर पर टैक्स ऑडिट तब जरूरी होता है, जब किसी वित्त वर्ष में उनकी कुल बिक्री या टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा हो. हालांकि, अगर नकद में मिलने वाली रकम और नकद भुगतान, दोनों कुल रकम के 5% से कम हैं, तो यह सीमा बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो सकती है. वहीं, डॉक्टर, वकील और दूसरे पेशेवरों के लिए आमतौर पर सालाना सकल कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा होने पर टैक्स ऑडिट जरूरी हो सकता है.

इसके अलावा, प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन योजना का लाभ लेने वाले कुछ करदाताओं पर भी ऑडिट के नियम लागू होते हैं. इसमें धारा 44AD, 44ADA, 44AE, 44BB और 44BBB के तहत आने वाले मामले शामिल हैं. तय नियमों के अनुसार, कम आय घोषित करने या योजना से बाहर आने पर भी कुछ मामलों में ऑडिट कराना पड़ सकता है. कंपनियों और अन्य संस्थाओं को भी संबंधित कानूनों के तहत ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी पड़ सकती है.

टैक्स ऑडिट की तारीख निकलने पर कितना जुर्माना?

अगर कोई करदाता आयकर कानून की धारा 44AB के तहत जरूरी टैक्स ऑडिट नहीं कराता या समय पर रिपोर्ट जमा नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है. आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक, जुर्माना कारोबार या पेशे से हुई कुल बिक्री, टर्नओवर या सकल प्राप्तियों का 0.5% या 1.5 लाख रुपये हो सकता है. इन दोनों में से जो रकम कम होगी, उसे जुर्माने के तौर पर लगाया जा सकता है. हालांकि, सही कारण होने पर कुछ मामलों में जुर्माने से राहत मिल सकती है.

टैक्स ऑडिट में किन दस्तावेजों की जांच होती है?

टैक्स ऑडिट के दौरान चार्टर्ड अकाउंटेंट कारोबार के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करता है. इसमें नकदी का हिसाब, खाते की बही, बैंक स्टेटमेंट, स्टॉक का रिकॉर्ड और बिक्री व खरीद के बिल शामिल हो सकते हैं. इसका मकसद यह देखना है कि आय और खर्च का हिसाब सही है और आयकर कानून के मुताबिक जरूरी जानकारी दी गई है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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