भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस जियो का IPO आ रहा है. खास बात ये है कि कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. यह IPO भारत के सबसे बड़े IPO में से एक बन सकता है. टेलीकॉम इंडस्ट्री में जियो की एंट्री उस वक्त हुई थी, जब मोबाइल पर बात करना और इंटरनेट का इस्तेमाल करना महंगा सौदा माना जाता था. लेकिन मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने फ्री कॉलिंग और सस्ते इंटरनेट के दम पर देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री की तस्वीर बदल दी.

IPO के लिए 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक बोली लगाई जा सकेगी. कंपनी ने प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया है. इस IPO के जरिए करीब ₹30,000 करोड़ जुटाने की योजना है. यह सिर्फ एक कंपनी के शेयर बाजार में आने की कहानी नहीं है, बल्कि धीरूभाई अंबानी के उस सपने के विस्तार की कहानी भी है, जिसने देश में मोबाइल इंटरनेट को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. सवाल यह है कि फ्री कॉलिंग से शुरू हुआ जियो का सफर अब निवेशकों के लिए कितना बड़ा मौका बन सकता है?
Jio ने कैसे बदली टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर
साल 2016 में जब रिलायंस जियो ने टेलीकॉम बाजार में कदम रखा, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि नई कंपनी इतनी जल्दी पूरे सेक्टर को बदल देगी. मुकेश अंबानी ने देशभर में 4G नेटवर्क तैयार करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए. उस समय कंपनी के पास बड़ी संख्या में ग्राहक भी नहीं थे. इसके बाद जियो ने वॉयस कॉलिंग फ्री कर दी और इंटरनेट डेटा की कीमतें काफी कम रखीं. इससे दूसरी टेलीकॉम कंपनियों पर भी अपने टैरिफ घटाने का दबाव पड़ा. जियो की रणनीति थी कि पहले बड़ा नेटवर्क बनाया जाए और फिर सस्ती सेवाओं के जरिए ज्यादा से ज्यादा ग्राहक जोड़े जाएं.
Jio का ग्राहक नेटवर्क कितना बड़ा?
रिपोर्ट के मुताबिक, जियो की शुरुआत से पहले नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और टेक्नोलॉजी पर करीब 25 अरब डॉलर का निवेश किया गया था. मुकेश अंबानी ने एक इंटरव्यू में जियो को रिलायंस का सबसे बड़ा जोखिम बताया था. उनका मानना था कि अगर इस निवेश से ज्यादा मुनाफा नहीं भी मिलता, तब भी भारत को डिजिटल बनाने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती थी. आज जियो देश की सबसे बड़ी डिजिटल कनेक्टिविटी कंपनियों में शामिल है. 31 मार्च 2026 तक इसके 26.85 करोड़ 5G ग्राहक थे. वहीं, JioFiber और JioAirFiber के 2.71 करोड़ ग्राहक थे, जिससे यह देश की सबसे बड़ी फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी बनी.
फ्री कॉलिंग से ₹10 लाख करोड़ की कंपनी
जियो ने शुरुआती दिनों में ग्राहकों को फ्री कॉलिंग और डेटा दिया. इसके बाद भी कंपनी ने डेटा की कीमतें कम रखीं. साल 2017 में रिलायंस ने JioPhone लॉन्च किया. यह 4G सपोर्ट वाला फीचर फोन था, जिसे तय शर्तों के तहत ₹1,500 की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट पर मुफ्त में लिया जा सकता था. इसका मकसद उन लोगों तक इंटरनेट पहुंचाना था, जो महंगा स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते थे. समय के साथ जियो का कारोबार मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़ा. अब Jio Platforms के तहत मोबाइल नेटवर्क, होम ब्रॉडबैंड, कंपनियों के लिए डिजिटल सेवाएं और कई तरह के ऐप शामिल हैं. ध्यान देने वाली बात है कि IPO Jio Platforms का है, सिर्फ टेलीकॉम कंपनी Reliance Jio Infocomm का नहीं. इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना है. इससे मिलने वाली रकम का कुछ हिस्सा टेलीकॉम कारोबार की सब्सिडियरी कंपनी का कर्ज घटाने और बाकी सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
भारत की डिजिटल क्रांति में जियो की भूमिका
जियो की सस्ती इंटरनेट सर्विस से लोगों के लिए वीडियो देखना, ऑनलाइन पढ़ाई करना, डिजिटल पेमेंट और सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करना आसान हुआ. हालांकि, भारत की डिजिटल क्रांति में सरकार की योजनाओं, UPI, बैंक खातों, स्मार्टफोन और दूसरी कंपनियों की भी अहम भूमिका रही है. जियो का बड़ा योगदान इंटरनेट को सस्ता और ज्यादा लोगों तक पहुंचाना रहा. धीरूभाई अंबानी का सपना था कि फोन कॉल आम लोगों के लिए भी सस्ती होनी चाहिए. मुकेश अंबानी ने इसी सोच को इंटरनेट के दौर में आगे बढ़ाया. अब रिलायंस का ध्यान 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसी टेक्नोलॉजी पर भी है.