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कच्चे तेल ने भारत की टेंशन बढ़ाई, चार साल बाद 10% से ज्यादा थोक महंगाई​

रिटेल महंगाई के बाद अब देश को थोक महंगाई ने भी बड़ा झटका दिया है. चार साल के बाद यानी सितंबर 2022 के बाद देश में थोक महंगाई की दर 10 फीसदी से ज्यादा देखने को मिली है. आंंकड़ों को देखें तो सितंबर 2026 में देश की थोक महंगाई की दर 11 फीसदी से ज्यादा […]

रिटेल महंगाई के बाद अब देश को थोक महंगाई ने भी बड़ा झटका दिया है. चार साल के बाद यानी सितंबर 2022 के बाद देश में थोक महंगाई की दर 10 फीसदी से ज्यादा देखने को मिली है. आंंकड़ों को देखें तो सितंबर 2026 में देश की थोक महंगाई की दर 11 फीसदी से ज्यादा देखने को मिली है. जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से ऐसा देखने को मिला है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से थोक महंगाई को लेकर किस तरह के आंकड़े जारी किए हैं.

बुधवार को कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में थोक महंगाई सालाना आधार पर 11.39 फीसदी तक बढ़ गईं, जो अगस्त में 9.92% थीं. इसकी वजह फ्यूल और बिजली, खानेपीने की चीजों और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी थी. इस महीने की शुरुआत में अर्थशास्त्रियों के एक रॉयटर्स पोल में इस महीने के लिए होलसेल महंगाई दर 10.18% रहने का अनुमान लगाया गया था. वहीं, इस हफ्ते की शुरुआत में आए आंकड़ों से पता चला कि देश में रिटेल महंगाई दर अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% हो गई. इसकी वजह खानेपीने की चीजों, खासकर सब्जियों की कीमतों में तेजी से हुई बढ़ोतरी थी.

4 साल के बाद 10 फीसदी से ज्यादा थोक महंगाई

खास बात तो ये है कि 4 साल के बाद थोक महंगाई दर 10 फीसदी से ज्यादा या यूं कहें कि डबल डिजिट में देखने को मिले हैं. आखिरी बार सितंबर 2022 में थोक महंगाई के आंकड़े 10.70 फीसदी देखने को मिले थे. इसका मतलब है कि देश में थोक महंगाई 4 साल के हाई पर पहुंच गई है. वहीं दूसरी ओर ये लगातार दूसरा महीना है, जब थोक महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिली है. जुलाई महीने की थोक महंगाई में मामूली गिरावट देखने को मिली थी. उससे पहले नवंबर 2025 से लेकर जून 2026 तक थोक महंगाई में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली थी.

फ्यूल और पॉवर की महंगाई ने डाला असर

सितंबर में फ्यूल और पॉवर की महंगाई दर अगस्त के 22.93% से बढ़कर 25.85% हो गई, जबकि मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई दर 8.37% से बढ़कर 9.76% हो गई. इसी दौरान प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 7.76% से बढ़कर 8.67% हो गई.

होलसेल फूड इंडेक्स में सितंबर में महंगाई दर 8.66% दर्ज की गई, जो अगस्त में 7.05% थी. मिनिस्ट्री ने बताया कि होलसेल महंगाई दर बढ़ाने वाले मुख्य कारकों में मिनरल ऑयल, खानेपीने की चीज़ें, कच्चा तेल और नैचुरल गैस, कोयला और लिग्नाइट, बेसिक मेटल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, रबर और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट शामिल थे.

क्या कह रहे हैं इकोनॉमिस्ट?

अर्थशास्त्रियों ने अलनीनो और मॉनसून की असमान बारिश को फ़ूड महंगाई दर के लिए मुख्य रिस्क बताया और चेतावनी दी कि इनसे खरीफ की पैदावार पर असर पड़ सकता है और रबी की बुआई में देरी हो सकती है. ICRA की अदिति नायर और ANZ के धीरज निम ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि जलाशयों में औसत से कम पानी का स्तर सर्दियों की फसलों के लिए चिंता का विषय है, और खानेपीने की चीज़ों की कीमतों पर इसका असर फसल के उत्पादन और खराब मौसम की स्थितियों पर निर्भर करेगा. दुनिया भर में कमोडिटी और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें खानेपीने की चीज़ों की कीमतों पर दबाव बढ़ाती हैं.

क्यों बढ़ी थोक महंगाई?

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें खेती, सिंचाई और ट्रांसपोर्टेशन की कॉस्ट बढ़ा सकती हैं, जबकि लिक्विफाइड नेचुरल गैस की ऊंची कीमतें फर्टिलाइजर की कॉस्ट बढ़ा सकती हैं. खाने के तेल के लिए भारत का आयात पर निर्भर होना भी इस कैटेगरी को वैश्विक कीमतों में उतारचढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है, जबकि माल ढुलाई, पैकेजिंग और फसल सुरक्षा की हाई कॉस्ट खानेपीने की चीजों को बाजार तक लाने का खर्च बढ़ा सकती है. अक्टूबर की शुरुआत में, RBI ने बेंचमार्क रेपो रेट को बढ़ाकर 5.5% कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद से ऐसी पहली बढ़ोतरी थी. गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि यह साफ है कि महंगाई और उसके अनुमान उतने सामान्य नहीं हैं जितने पिछले साल थे.

सितंबर के WPI महंगाई के आंकड़े संशोधित सीरीज के तहत जारी किए गए थे. इस सीरीज को जून में 202223 को आधार वर्ष मानकर शुरू किया गया था, ताकि इकोनॉमी के मौजूदा ढांचे को बेहतर ढंग से दिखाया जा सके. नई सीरीज में कमोडिटी बास्केट को 697 से बढ़ाकर 957 आइटम कर दिया गया है और इसमें सोलर, विंड और न्यूक्लियर पॉवर जैसे एनर्जी के नए स्रोत भी शामिल किए गए हैं.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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