अमेरिकी एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी Lockheed Martin ने भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. कंपनी ने कहा है कि अगर उसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की डील मिलती है, तो भारत में विमान उत्पादन की क्षमता को और बढ़ाया जाएगा. भारत ने अगस्त में करीब 10.5 अरब डॉलर यानी लगभग 90,000 करोड़ रुपये की इस डील के लिए टेंडर जारी किया था.

60 विमानों की खरीद के लिए मुकाबला
इस डील में पांच भारतीय कंपनियां शामिल हैं. इनमें Tata Advanced Systems Limited , Mahindra Group, Adani Defence & Aerospace, Hindustan Aeronautics Limited और Reliance Defence शामिल हैं. इन कंपनियों को ग्लोबल एयरक्राफ्ट कंपनियों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट में हिस्सा लेना है. TASL ने Lockheed Martin के साथ साझेदारी की है, जबकि Mahindra ने ब्राजील की Embraer के साथ हाथ मिलाया है.
48 विमान भारत में बनाने का प्रस्ताव
Lockheed Martin के प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनी 60 में से 48 विमानों का निर्माण भारत में करना चाहती है. बाकी 12 विमान सीधे तैयार हालत में भारत को दिए जाएंगे. कंपनी का कहना है कि अगर उसकी बोली सफल होती है तो भारत में पहले से मौजूद उत्पादन नेटवर्क और क्षमताओं को और विस्तार दिया जाएगा.
Lockheed Martin और Tata की पहले से साझेदारी है. भारत में Tata Advanced Systems, C130J विमान के कई कंपोनेंट और एम्पेनेज तैयार करती है. अब कंपनी इसी मौजूदा क्षमता को आगे बढ़ाकर उत्पादन और दूसरी गतिविधियों का विस्तार करना चाहती है.
C130J बेड़े को भी अपग्रेड करने की योजना
Lockheed Martin ने भारतीय वायुसेना के मौजूदा 12 C130J विमानों को भी अपग्रेड करने का प्रस्ताव दिया है. इन विमानों को नए विमानों के समान एडवांस कॉन्फिगरेशन में लाने की योजना है. ऐसा होने पर भारतीय वायुसेना के पास एक जैसे कॉन्फिगरेशन वाले कुल 72 विमान हो सकते हैं. भारतीय वायुसेना का मौजूदा C130J बेड़ा अब तक 58,000 से ज्यादा फ्लाइट घंटे पूरे कर चुका है. इन विमानों का इस्तेमाल लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन, मानवीय सहायता और विदेशों से भारतीय नागरिकों को निकालने जैसे मिशनों में किया गया है.
भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा
अगर यह डील Lockheed Martin और Tata Advanced Systems के पक्ष में जाती है, तो भारत में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सप्लाई चेन को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है. इससे स्थानीय उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ भारतीय कंपनियों की ग्लोबल एयरोस्पेस सप्लाई चेन में भागीदारी भी बढ़ सकती है. हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और डील के लिए दूसरी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में हैं.