भारत में रिटेल गोल्ड का कारोबार अब सिर्फ बड़े शहरों तक लिमिटेड नहीं रह गया है. गोल्ड ज्वेलरी और दूसरे रिटेल ब्रांड्स अब टियर2 और टियर3 शहरों में भी तेजी से एक्सपैंड कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह मेट्रो और टियर1 शहरों में अच्छी लोकेशन की कमी और बढ़ता रेंट है. ऐसे में छोटे शहर ब्रांड्स के लिए नए स्टोर खोलने का बड़ा मार्केट बन रहे हैं.

नाइट फ्रैंक और इंडस्ट्री बॉडी सीआईआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 के बाद टियर2 शहरों में 59 लाख स्क्वायर फीट ग्रेडA रिटेल स्पेस जुड़ा है. वहीं, टियर1 शहरों में करीब 19 लाख स्क्वायर फीट स्पेस ही जुड़ा. यानी छोटे शहरों में नई रिटेल स्पेस की सप्लाई टियर1 शहरों के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा रही.
मेट्रो में महंगा पड़ रहा स्टोर खोलना
इसका मतलब यह नहीं है कि रिटेल ब्रांड्स मेट्रो शहरों से बाहर जा रहे हैं. मेट्रो और टियर1 शहर अभी भी बड़े ब्रांड्स के लिए अहम मार्केट हैं. लेकिन यहां नई और अच्छी लोकेशन मिलना मुश्किल होता जा रहा है. साथ ही प्राइम लोकेशन का रेंट भी काफी ज्यादा है.
लाइफस्टाइल इंटरनेशनल के सीईओ देवराजन अय्यर के मुताबिक, मेट्रो मार्केट में सैचुरेशन बढ़ रहा है और रियल एस्टेट की कीमतें भी काफी ज्यादा हैं. ऐसे में वहां लगातार प्रॉफिट के साथ बिजनेस चलाना महंगा हो रहा है.
छोटे शहरों में बड़ी गुंजाइश
टियर2 शहरों में ऑर्गनाइज्ड रिटेल का मार्केट अभी मेट्रो के मुकाबले छोटा है. यही वजह है कि यहां नए स्टोर्स के लिए ज्यादा स्पेस उपलब्ध है. रिपोर्ट के अनुसार, टियर1 शहरों में ऑर्गनाइज्ड शॉपिंग सेंटर स्टॉक करीब 9.8 करोड़ स्क्वायर फीट है, जबकि टियर2 शहरों में यह करीब 3.6 करोड़ स्क्वायर फीट है.
खास बात यह है कि छोटे शहरों में रिटेल स्पेस की क्वालिटी भी बेहतर हो रही है. टियर2 शहरों के शॉपिंग सेंटर स्टॉक में ग्रेडA प्रॉपर्टीज की हिस्सेदारी 61% है, जबकि टियर1 शहरों में यह 46% है.
ईकॉमर्स ने भी बढ़ाया भरोसा
टियर2 और टियर3 शहरों में ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती पहुंच ने भी ब्रांड्स को यहां फिजिकल स्टोर खोलने का भरोसा दिया है. यानी ग्राहक पहले ऑनलाइन ब्रांड्स से जुड़ रहे हैं और अब उन्हीं ब्रांड्स के स्टोर छोटे शहरों में भी खुल रहे हैं.
नाइट फ्रैंक के मुताबिक, 24 टियर2 मार्केट में 37 देशों के 255 ब्रांड्स के 1,720 इंटरनेशनल ब्रांड स्टोर मौजूद हैं. 2025 में भारत के 41 करोड़ एक्टिव इंटरनेट यूजर्स में से अनुमानित 6070% यूजर्स टियर2 और टियर3 शहरों से थे.
हालांकि, मेट्रो शहरों की अहमियत अभी भी बनी हुई है. लाइफस्टाइल का 80% से ज्यादा रेवेन्यू अभी भी मेट्रो और टियर1 मार्केट से आता है. यानी रिटेल गोल्ड और दूसरे ब्रांड्स छोटे शहरों में नए मौके तलाश रहे हैं, लेकिन बड़े शहर अभी भी उनके कारोबार का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं.