यूं तो महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं, फिर भी दोनों में एक समानता तो है. वो ये कि दोनों कभी बीडीएम के जरिये खेला करते थे. सचिन बीडीएम के बल्ले से रन बनाया करते थे तो कांग्रेस बीडीएम के बल्ले से वोट जुटाया करती थी. लेकिन समय के साथ दोनों ने बल्ला बदल लिया. अब सचिन सन्यास ले चुके हैं लेकिन कांग्रेस एक बार फिर वोट जुटाने के लिए अपने पुराने बल्ले बीडीएम से खेलने के मूड में दिखाई दे रही है.

प्रदेश अध्यक्ष आराधना, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम यानी ब्राह्मण, दलित और मुसलमान को प्राथमिकता देने की रणनीति ने ये स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस अब अक्रामकता के साथ 2027 के चुनाव में कैम्पेनिंग करने जा रही है. इसके साथ ही कांग्रेस अब अपने पुराने वोट बैंक को हासिल करने के लिए अपने पुराने फार्मूले पर भी लौट रही है. अरसे बाद कांग्रेस ने राजनैतिक सौम्यता की जगह आक्रामक तेवर को तरजीह देने का मन बना लिया है.
ऐन वक्त पर बदला कमांडर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया है. रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा मोना को अब यूपी कांग्रेस की कमान दी गई है. इसके जरिए कांग्रेस ने ब्राह्मण वोटरों के बीच संदेश देने की कोशिश की है. उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण+ त्यागी राय करीब 1314 फीसदी माने जाते हैं. एक दौर में ब्राह्मणमुस्लिम और दलित का कॉम्बिनेशन कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाता था, लेकिन कुछ दशकों में यह गठजोड़ टूट गया है.
मुस्लिम वोट बैंक पर भी फोकस
पार्टी ने सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा महाराजगंज जिले के आलोक प्रसाद और गोरखपुर के रहने वाले देवेंद्र निषाद को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है. इससे पहले अजय राय, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे. जिनकी भूमिहार जाति का असर मऊ, गाजीपुर और वाराणसी के कई विधानसभा सीटों पर है. अब कांग्रेस ने नई कार्यकारिणी के जरिए नए समीकरण बनाने की कोशिश की है.
टीम में इमरान मसूद के मायने
आराधना मिश्रा मोना को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने सपा से सौहार्दपूर्ण बातचीत का माहौल तो बना दिया है, लेकिन कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को टीम में तवज्जो देकर दबाव बनाने की रणनीति भी अपनाई है. अजय राय की तुलना में इमरान मसूद अखिलेश और सपा के खिलाफ कुछ ज्यादा बयानबाजी करते रहे हैं. इमरान मसूद की तल्खी उस वक्त ज्यादा बढ़ गई, जब सपा ने उनके दामाद को अपने पाले में खींच लिया. इसके बाद से इमरान मसूद लगातार सपा पर हमलावर हैं. ऐसे में कांग्रेस हाईकमान ने सपा पर दबाव बनाए रखने के लिए इमरान को प्रदेश टीम में अहम जिम्मेदारी दी.
फोकस में मुस्लिम वोट
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट निर्णायक होते हैं और करीब 19% के आसपास मुस्लिम मतदाता है. पूरब से पश्चिम तक इनकी संख्या ठीकठाक है. इस नाते कांग्रेस ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर अपने पुराने वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद, सहारनपुर, संभल, रामपुर, पूर्वांचल में बहराइच, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ सहित कई जिलों की सीटों पर मुस्लिम वोट बैंक ही चुनाव नतीजे तय करते हैं.
यूपी में कांग्रेस का ओबीसी दांव
कांग्रेस ने ओबीसी समीकरण साधने की कोशिश की है. इसके लिए फरेंदा से विधायक वीरेंद्र चौधरी को कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाए जाने की चर्चा है. वीरेंद्र चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर क्षेत्र की फरेंदा सीट से जीत दर्ज की थी. कांग्रेस के इस फैसले को पूर्वांचल में कुर्मी समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
राहुल से मिले स्वामी प्रसाद
उत्तर प्रदेश में मौर्य नेता स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी पार्टी चला रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने दिल्ली जाकर राहुल गांधी से मुलाकात की है. माना जा रहा है कि वह अपने बेटे को ऊंचाहार से चुनाव लड़ाना चाहते हैं. इसलिए चाहते हैं कि बेटे को कांग्रेस का टिकट मिले. उत्तर प्रदेश मौर्य बिरादरी की संख्या अच्छी खासी है.इसको देखते हुए राहुल गांधी उनको मौका दे सकते हैं.