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चाय की दुकान का ऐसा नाम कि हर कोई रुक जाए! प्यार में धोखा मिला तो बन गए बलिया के ‘बेवफा चायवाले’​

कहते हैं प्यार में मिला धोखा इंसान को तोड़ देता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया में एक शख्स ने अपने इसी दर्द को अपनी पहचान बना लिया. बांसडीहपिंडारा मार्ग पर पिंडारा पेट्रोल पंप के सामने एक ऐसी चाय की दुकान है, जिसका नाम राह चलते लोगों को रुकने पर मजबूर कर देता हैबेवफा चायवाला. […]

कहते हैं प्यार में मिला धोखा इंसान को तोड़ देता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया में एक शख्स ने अपने इसी दर्द को अपनी पहचान बना लिया. बांसडीहपिंडारा मार्ग पर पिंडारा पेट्रोल पंप के सामने एक ऐसी चाय की दुकान है, जिसका नाम राह चलते लोगों को रुकने पर मजबूर कर देता हैबेवफा चायवाला. दुकान के नाम के साथ लिखा है, क्या लेंगे आप, चाय या धोखा? यही लाइन अब इस दुकान की पहचान बन चुकी है.

इस दुकान को चलाने वाले रितेश कुमार यादव बलिया के बांसडीह पिंडारा के रहने वाले हैं. रितेश बताते हैं कि प्यार में मिले धोखे के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी और चाय की दुकान खोल ली. हालांकि मोहब्बत की उस कहानी के बारे में वह ज्यादा बात नहीं करना चाहते. उनके मुताबिक, पीछे की कहानी काफी गमगीन है और अब उसे बताना आसान नहीं है.

रितेश सुबह करीब पांच बजे से रात नौ बजे तक चाय बनाते हैं. उनकी दुकान पर लाल चाय, नींबू वाली चाय, मलाई वाली चाय और दूध वाली चाय समेत कई तरह की चाय मिलती है. खास बात यह है कि वह पीतल के बर्तन में चाय तैयार करते हैं और ग्राहकों को मिट्टी के कुल्हड़ में चाय परोसते हैं. इसी अंदाज और स्वाद ने दुकान को इलाके में खास पहचान दिलाई है.

क्या है कहानी?

रितेश के मित्र गौरव पांडे बताते हैं कि दुकान पर लोग लंबे समय से चाय पीने आते हैं. उनके मुताबिक, लॉकडाउन के दौर से ही दुकान पर ग्राहकों की भीड़ बनी रही है. गौरव ने आसपास के लोगों से रितेश की कहानी जानने की कोशिश की तो पता चला कि दुकान खोलने से पहले रितेश ट्रक चलाते थे. इसी दौरान उन्हें किसी से प्रेम हुआ, लेकिन बाद में उन्हें प्यार में धोखा मिला. इसके बाद उन्होंने ट्रक चलाना छोड़कर चाय की दुकान शुरू कर दी और इसका नाम बेवफा चायवाला रख दिया.

अब यह दुकान सिर्फ चाय के स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी अनोखी कहानी और नाम के लिए भी मशहूर है. रितेश के मुताबिक उनकी दुकान पर दूरदूर से लोग चाय पीने आते हैं. स्थानीय लोगों के अलावा सरकारी अधिकारी और नेता भी यहां चाय का स्वाद ले चुके हैं.

‘चाय लेंगे या धोखा’

स्थानीय निवासी गिरावन प्रसाद भी रितेश की चाय के मुरीद हैं. उनका कहना है कि पीतल के बर्तन में बनी चाय और मिट्टी के कुल्हड़ में उसका स्वाद अलग ही महसूस होता है. यही वजह है कि वह अक्सर यहां चाय पीने आते हैं. कभी प्यार में मिले दर्द से शुरू हुई यह कहानी आज एक ऐसी चाय की दुकान बन चुकी है, जहां ग्राहक चाय की चुस्की लेते हुए मुस्कुराकर सवाल पूछते हैं भाई, चाय मिलेगी या धोखा?

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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