Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में नाबालिग बच्चियों की गुमशुदगी एक गंभीर और खौफनाक मोड़ ले चुकी है. पुलिस मुख्यालय की महिला सेल द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में रोजाना औसतन 40 नाबालिग बच्चियां गायब हो रही हैं. साल 2026 के शुरुआती आठ महीनों के भीतर बच्चियों के गायब होने के 9,760 नए मामले दर्ज किए गए. पुराने लंबित मामलों को मिलाकर कुल 12,387 प्रकरण पुलिस फाइलों में दर्ज हुए.

पुलिस ने राज्य और अंतरराज्यीय स्तर पर विशेष टीमें भेजकर 9,084 बच्चियों को तो सुरक्षित ढूंढ निकाला , लेकिन 3,303 मासूम बेटियां अब भी खाकी की पहुंच से दूर हैं. आंकड़े यह भी बताते हैं कि गायब होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों से तीन गुना अधिक है.
लगातार बढ़ता रहा लंबित मामलों का ग्राफ
पुलिस के पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि हर साल बड़ी संख्या में बच्चियों के लापता रहने के मामले सामने आते रहे हैं.
2021: साल के अंत में 2,830 बच्चियां लापता थीं.
2022: आंकड़ा बढ़कर 2,944 हुआ.
2023: पेंडिंग मामलों की संख्या 3,764 पहुंची.
2024: यह आंकड़ा अपने उच्चतम स्तर 4,001 तक जा पहुंचा.
2025: पुलिस ने सघन अभियान चलाकर पुराने लंबित मामलों सहित रिकॉर्ड 14,520 बच्चियों को खोज निकाला, जिससे पेंडिंग आंकड़े घटकर 2,627 रह गए थे.
2026 : नए मामलों की आवक से लंबित आंकड़ा फिर बढ़कर 3,303 हो गया है.
इंदौर शीर्ष पर, धार दूसरे और जबलपुर तीसरे स्थान पर
सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुछ जिले लगातार चिंताजनक स्थिति में बने हुए हैं. पीएचक्यू की सूची में जिलों की स्थिति इस प्रकार है.
- इंदौर: 772 लंबित मामले
- धार: 559 लंबित मामले
- जबलपुर: 504 लंबित मामले
- भोपाल: 493 लंबित मामले
- सागर: 439 लंबित मामले
- रतलाम: 417 लंबित मामले
A, B, C ग्रेडिंग और डीजीपी की वनटूवन बैठकें
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के प्रदर्शन के आधार पर Category A, B, C ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया है. राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों में एमपी पुलिस की स्पेशल टीमें डेरा डालकर बच्चियों की तलाश कर रही हैं. हर महीने समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं. जिस जिले का प्रदर्शन असंतोषजनक रहता है, वहां के पुलिस अधीक्षकों के साथ राज्य के पुलिस महानिदेशक खुद वनटूवन बैठक कर जवाबतलब कर रहे हैं. हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक 3,303 लापता बेटियों का सुराग नहीं मिल जाता, तब तक यह मुहिम जारी रहेगी.